सौरभ श्रीवास्तव संवाददाता कटनी— जिले में रेत खनन पर प्रतिबंध के बावजूद अवैध कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। कागजों में खनन पूरी तरह बंद है, लेकिन जमीनी स्तर पर रेत की सप्लाई लगातार जारी है। जानकारों के अनुसार पिछले 6 से 8 महीनों में इस अवैध कारोबार से शासन को 30 करोड़ रुपए से अधिक की राजस्व हानि हो चुकी है, वहीं जीएसटी के रूप में मिलने वाले करीब 5 करोड़ रुपए का अतिरिक्त नुकसान भी सामने आ रहा है।जानकारी के मुताबिक जुलाई 2025 में ठेका कंपनी द्वारा जिले की रेत खदानें सरेंडर कर दी गई थीं। इसके बाद से अब तक नई ठेका प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। जिले की 45 रेत खदानों में खनन और भंडारण पूरी तरह प्रतिबंधित होने के बावजूद शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक रेत की उपलब्धता बनी हुई है, जिससे प्रशासनिक दावों पर सवाल उठ रहे हैं।टोपी के दुरुपयोग से चल रहा खेलरेत कारोबार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बाहर से आने वाली रेत के परमिट (टोपी) का दुरुपयोग किया जा रहा है। इन परमिटों का पुनः उपयोग कर जिले में अवैध उत्खनन की रेत खपाई जा रही है। स्थानीय स्तर पर सक्रिय सैंड सिंडिकेट इस पूरे खेल को संचालित कर रहा है, जिससे शासन को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।ठेका प्रक्रिया में अटका मामलाबताया जाता है कि माइनिंग कॉर्पोरेशन द्वारा वर्ष 2025 में निकाला गया टेंडर भी विवादों में घिर गया था। पहले अनुबंध को लेकर मामला अटका, फिर कम दरों पर ठेका दिए जाने को लेकर विवाद बढ़ा और अंततः ठेका निरस्त कर दिया गया। मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा और अब रिटेंडर की प्रक्रिया 30 मार्च तक बढ़ा दी गई है।बड़ा सवाल – रेत आ कहां से रही?खनिज विभाग के अनुसार जिले में फिलहाल किसी भी कंपनी या व्यक्ति को खनन या भंडारण की अनुमति नहीं दी गई है। इसके बावजूद खुलेआम रेत का परिवहन और बिक्री जारी है। विभाग द्वारा कार्रवाई किए जाने की बात कही जा रही है, लेकिन ये प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं।प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालजिले में अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण पर प्रभावी रोक न लग पाने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब निगाहें 30 मार्च को होने वाली रिटेंडर प्रक्रिया पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि जिले में रेत कारोबार को वैध रूप से कब तक पटरी पर लाया जा
खनन बंद, फिर भी रेत सप्लाई चालू—शासन को करोड़ों की चपत
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