P?c1=2&c2=41463588&cv=3.9
Friday, April 17, 2026
No menu items!
spot_img
Homeमध्यप्रदेशभोपालकौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय ने भोपाल में जेएसएस जोनल कॉन्फ्रेंस-कम-स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन...

कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय ने भोपाल में जेएसएस जोनल कॉन्फ्रेंस-कम-स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन और प्रोग्रेस रिव्यू वर्कशॉप आयोजित किया

भोपाल: कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) ने 26-27 फरवरी 2026 को आरसीवीपी नोरोन्हा एकेडमी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन, भोपाल, मध्य प्रदेश में दो दिन का जन शिक्षण संस्थान (जेएसएस) जोनल कॉन्फ्रेंस-कम-स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन और प्रोग्रेस रिव्यू वर्कशॉप आयोजित किया। इस वर्कशॉप में देश भर के 143 जन शिक्षण संस्थानों (जेएसएस) के साथ-साथ राज्य सरकारों, ट्राइफेड, निस्बड, बैंकिंग संस्थानों, डिस्ट्रिक्ट इंडस्ट्री सेंटर्स, इंडस्ट्री पार्टनर्स और दूसरे स्टेकहोल्डर्स के प्रतिनिधि शामिल हुए।

इस कॉन्फ्रेंस ने मौजूदा वित्तीय वर्ष में जेएसएस की फिजिकल और फाइनेंशियल प्रगति की समीक्षा करने और DAJGUA समेत विभिन्न पहलों के तहत क्रियान्वयन का आकलन करने के लिए एक स्ट्रक्चर्ड नेशनल प्लेटफॉर्म के तौर पर काम किया। इसने स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन का भी अवसर दिया, जिसका उद्देश्य गवर्नेंस मैकेनिज्म को मजबूत करना, कन्वर्जेंस को बेहतर बनाना और योजना को मापनीय आजीविका परिणामों के साथ और निकटता से जोड़ना था।

जन शिक्षण संस्थान योजना, भारत सरकार की पूरी तरह से वित्तपोषित केन्द्रीय सेक्टर की योजना है। यह निरक्षर, नव-साक्षर तथा स्कूल छोड़ चुके युवाओं और वयस्कों को नॉन-फॉर्मल, कम्युनिटी-बेस्ड वोकेशनल ट्रेनिंग देती है। इस योजना में महिलाओं तथा अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अल्पसंख्यकों और अन्य वंचित वर्गों पर विशेष ध्यान दिया जाता है। वित्तीय वर्ष 2018-19 से 31 दिसंबर 2025 तक इस योजना के अंतर्गत 34 लाख से अधिक लाभार्थियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है, जिनमें से 83 प्रतिशत महिलाएँ हैं। वर्तमान में यह योजना देशभर में 294 जेएसएस के माध्यम से संचालित की जा रही है, जहाँ 51 एनएसक्यूएफ़-संरेखित जॉब रोल्स में प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।

प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए, भारत सरकार के कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय की सचिव,श्रीमती देवश्री मुखर्जी ने कहा कि जेएसएस इस बात का उदाहरण है कि स्किलिंग कैसे स्थानीय रूप से प्रासंगिक, सामाजिक रूप से समावेशी और परिणामोन्मुखी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस योजना की ताकत इसकी सामुदायिक पहुँच और वंचितों तक पहुँचने की क्षमता में निहित है। आगे चलकर, हमारा ध्यान कन्वर्जेंस को मजबूत करने, रोजगारपरक परिणामों को बेहतर बनाने तथा यह सुनिश्चित करने पर रहेगा कि प्रत्येक जिला समावेशी आर्थिक विकास के उत्प्रेरक के रूप में जेएसएस का प्रभावी उपयोग करे।

कार्यक्रम की गरिमामयी उपस्थिति सुश्री मानसी सहाय ठाकुर, संयुक्त सचिव, कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय; श्री प्रीति मैथिल, महाप्रबंधक, ट्राइफेड; डॉ. शिवानी डे, निदेशक, निस्बड; श्री इंदु भूषण लेंका, उप सचिव; तथा श्री हर्षवर्धन शर्मा मौजूद, उप निदेशक, कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय द्वारा बढ़ाई गई। उनकी उपस्थिति ने जमीनी स्तर पर कौशल विकास पहलों को सुदृढ़ करने में केंद्र–राज्य सहयोग और ट्राइबल कन्वर्जेंस के महत्व को रेखांकित किया।

वर्कशॉप में एम्प्लॉयबिलिटी और एंटरप्रेन्योरशिप, मार्केट की तैयारी और पैकेजिंग स्टैंडर्ड, जनजातीय आजीविका पहलों के साथ कन्वर्जेंस, और लाभार्थियों के लिए क्रेडिट लिंकेज को मजबूत करने पर फोकस करने वाले तकनीकी सेशन शामिल थे। निस्बड द्वारा आयोजित एक विशेष सेशन में एम्प्लॉयबिलिटी स्किल्स के महत्व पर प्रकाश डाला गया, जबकि उद्योग एवं संस्थागत साझेदारों, जैसे अमेज़न सहेली, के साथ हुई चर्चाओं में प्रोडक्ट की क्वालिटी, पैकेजिंग, ई-कॉमर्स की तैयारी और फॉर्मल फाइनेंस तक पहुंच को बेहतर बनाने पर फोकस किया गया। डिस्ट्रिक्ट इंडस्ट्री सेंटर, लीड बैंक, जेएसएस प्रतिनिधियों और लाभार्थियों के साथ एक मल्टी-स्टेकहोल्डर पैनल डिस्कशन में स्थानीय कन्वर्जेंस और उद्यम सहायता को सुदृढ़ करने के व्यावहारिक उपायों पर विचार-विमर्श किया गया।

मध्य प्रदेश सरकार के कौशल विभाग के संयुक्त निदेशक श्री सुकुमार मंडल और मध्य प्रदेश सरकार के जनजातीय विभाग की अतिरिक्त निदेशक श्रीमती रीता सिंह ने भी पैनल डिस्कशन में हिस्सा लिया और जिला स्तर पर इंस्टीट्यूशनल लिंकेज, कन्वर्जेंस मैकेनिज्म और आजीविका एकीकरण को प्रभावी बनाने के संबंध में महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए।

वर्कशॉप के साथ-साथ जेएसएस प्रोडक्ट्स की एक प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें ज़मीनी स्तर पर इनोवेशन, पारंपरिक हस्तशिल्प और स्थानी स्तर पर विकसित किए गए प्रोडक्ट्स दिखाए गए। इस प्रदर्शनी ने सतत आजीविका और बाज़ार एकीकरण पर योजना के विशेष जोर को और अधिक सुदृढ़ किया।

कॉन्फ्रेंस के दौरान एक प्रमुख सुधार के रूप में स्किल इंडिया डिजिटल हब (SIDH) पर साक्ष्य-आधारित, लाइव लाइवलीहुड सेल मॉड्यूल के क्रियान्वयन को रेखांकित किया गया। यह डिजिटल एकीकरण लाभार्थियों के परिणामों की स्ट्रक्चर्ड ट्रैकिंग को संभव बनाता है, जिसमें वेतनभोगी रोजगार, स्वरोजगार, सूक्ष्म-उद्यम विकास, स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ाव, ऋण सुविधा, रोजगार मेलों एवं प्रदर्शनी में सहभागिता तथा आय प्रभाव का दस्तावेजीकरण शामिल है। SIDH पर नामांकन, उपस्थिति, प्रमाणन और लाइवलीहुड मॉनिटरिंग का इंटीग्रेशन जेएसएस ईकोसिस्टम में पारदर्शिता, जवाबदेही और परिणामों के मापन को और अधिक सुदृढ़ करता है।

कार्यक्रम में हुआ विचार-विमर्श माननीय प्रधानमंत्री के समावेशी एवं आत्मनिर्भर विकसित भारत के विज़न के अनुरूप था, जहाँ स्किलिंग सम्मान और सोशल मोबिलिटी का रास्ता बनती है। कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय के माननीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और शिक्षा राज्य मंत्री श्री जयन्त चौधरी के मार्गदर्शन में, मंत्रालय कम्युनिटी-बेस्ड स्किलिंग मॉडल को मज़बूत करने, डिजिटल इंटीग्रेशन को गहरा करने और पूरक योजनाओं के साथ कन्वर्जेंस को बढ़ावा देने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।

पिछले कुछ सालों में, जेएसएस उल्लेखनीय उपलब्धियों के साथ एक मज़बूत लास्ट-माइल स्किलिंग मॉडल के तौर पर उभरा है। हर ज़िले में 30-35 सब-सेंटर के ज़रिए घर-घर ट्रेनिंग दी जाती है, जिससे ग्रामीण, आदिवासी, बॉर्डर, एलडब्ल्यूई और एस्पिरेशनल ज़िलों तक पहुँच सुनिश्चित होती है। हर जेएसएस हर साल लगभग 1,800 लाभार्थियों को स्थानीय स्तर पर कार्य की ट्रेनिंग देता है। ट्रेनिंग का पूरा लाइफ साइकिल – एनरोलमेंट, ट्रेनिंग, असेसमेंट और सर्टिफ़िकेशन – अब स्किल इंडिया डिजिटल हब (SIDH) पोर्टल पर आधार-बेस्ड ई-केवाईसी और बायोमेट्रिक फेस ऑथेंटिकेशन के साथ इंटीग्रेटेड है,जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही में वृद्धि होती है। लाभार्थियों को एनसीवीईटी -मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्र प्रदान किए जाते हैं, जो अर्जित कौशल की विश्वसनीयता और बाज़ार में मान्यता को मजबूत करते हैं। प्रत्येक जेएसएस में समर्पित लाइवलीहुड सेल्स रोजगारयोग्यता कौशल, स्वयं सहायता समूह (SHG) और ऋण संबंध, वेतन एवं स्वरोजगार अवसर, तथा प्रशिक्षण के बाद सपोर्ट को सुगम बनाते हैं।

भोपाल वर्कशॉप के परिणामों से यह अपेक्षा की जाती है कि वित्तीय वर्ष 2025–26 के दौरान जेएसएस योजना के क्रियान्वयन ढांचे को और सुदृढ़ किया जाएगा, कन्वर्जेंस और बाज़ार एकीकरण में सुधार होगा, तथा योजना की प्रभावशीलता को मजबूती मिलेगी।

सम्बंधित ख़बरें

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

लेटेस्ट