खबर डिजिटल/ ग्वालियर/ग्वालियर में आयोजित रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में पूरे देश में लघु उद्योग दिवस मनाया जा रहा है और इसी अवसर पर ग्वालियर में पहली बार रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्वालियर ऐतिहासिक धरोहरों, स्थापत्य कला, संगीत और संस्कृति के साथ-साथ आज उद्योग और पर्यटन के लिए भी नई पहचान बना रहा है।
उन्होंने कहा कि ग्वालियर का ऐतिहासिक किला राजा मानसिंह के समय में निर्मित हुआ था और इसकी स्थापत्य कला विश्व में अद्वितीय है। इस किले ने इतिहास के कठिन समयों को भी देखा है, जहां बड़े-बड़े सत्ताधीशों को बंदी बनाकर रखा गया। यही नहीं, बंदी छोड़ की परंपरा ने ग्वालियर में आध्यात्मिक आत्मा का प्रकटीकरण किया।
मुख्यमंत्री ने मुरैना के चौसठ योगिनी मंदिर का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके डिजाइन के आधार पर वर्ष 1912 में दिल्ली का संसद भवन बनाया गया था, जो लोकतंत्र का सबसे आकर्षक भवन माना जाता है। वहीं, नई संसद भवन को विदिशा के मंदिर के डिजाइन पर तैयार किया गया है और इसमें बना डोम सांची स्तूप की झलक प्रस्तुत करता है।
पर्यटन और जैव विविधता पर बोलते हुए डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में मानव और वन्य प्राणियों के बीच सहअस्तित्व का अद्भुत उदाहरण देखने को मिलता है। कूनो नेशनल पार्क में जब पर्यटक पहली बार चीता देखते हैं, तो वे आश्चर्यचकित रह जाते हैं।
ग्वालियर की संगीत परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह भूमि संगीत सम्राट तानसेन और बैजू बावरा की विरासत है। शिक्षा के क्षेत्र में भी ग्वालियर को बड़ी सौगात दी गई है। राजा मानसिंह विश्वविद्यालय के भवन निर्माण के लिए 50 करोड़ रुपये प्रदान किए गए हैं और जीवीजी विश्वविद्यालयों के विकास के लिए भी विशेष राशि दी गई है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि रीवा के बाद अब ग्वालियर को पर्यटन विकास की सौगात मिल रही है। इंडिगो कंपनी ने सीआरएस के माध्यम से ग्वालियर किले के विकास के लिए 100 करोड़ रुपये प्रदान किए हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज पूरी दुनिया में भारत की विरासत और पर्यटन स्थलों को नई पहचान दिला रहे हैं। मेक इन इंडिया और मेड इन इंडिया जैसे अभियानों के माध्यम से देश को स्वदेशी और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कार्य किए जा रहे हैं।


