डिंडोरी /शैलेश नामदेव /खबर डिजिटल/आस्था जब संकल्प का रूप ले ले, तब वह असंभव को भी संभव बना देती है। कुछ ऐसा ही अद्भुत दृश्य इन दिनों नर्मदा परिक्रमा पथ पर देखने को मिल रहा है, जहाँ धर्मपुरी जी महाराज माँ नर्मदा की संपूर्ण परिक्रमा हाथों के बल करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। यह केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मसंयम, तपस्या और भक्ति की वह साधना है, जो जनमानस को भीतर तक झकझोर रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार धर्मपुरी जी महाराज ने 2 अक्टूबर को अमरकंटक स्थित माई की बगिया से मां नर्मदा नदी की संपूर्ण परिक्रमा का यह कठिन और विलक्षण संकल्प लिया था। तभी से वे निरंतर हाथों के सहारे परिक्रमा पथ पर आगे बढ़ते हुए श्रद्धा और धैर्य की मिसाल पेश कर रहे हैं।
डिंडौरी के समीप दिखा आस्था का अनुपम दृश्य
सोमवार को धर्मपुरी जी महाराज डिंडौरी नगर से लगभग तीन किलोमीटर आगे परिक्रमा पथ पर अग्रसर दिखाई दिए। जैसे ही यह समाचार क्षेत्र में फैला, श्रद्धालुओं की भीड़ उनके दर्शन के लिए उमड़ पड़ी। समाजसेवी हरिहर पाराशर द्वारा महाराज का आत्मीय स्वागत कर विधिवत सम्मान किया गया। इस अवसर पर उपस्थित नागरिकों और श्रद्धालुओं ने उनके कठिन संकल्प को नमन करते हुए माँ नर्मदा से उनके उत्तम स्वास्थ्य और यात्रा की सफलता की कामना की।
साधना में सहभागिता बना विशेष आकर्षण
इस आध्यात्मिक यात्रा को और भी विशेष बनाता है कि महाराज के साथ दो सहयोगी साथी तथा एक श्वान निरंतर सहभागी बने हुए हैं। यह दृश्य लोगों के लिए आस्था और करुणा का प्रतीक बन गया है। मार्ग में पड़ने वाले गांवों और कस्बों के लोग श्रद्धा भाव से पुष्प अर्पित कर, जल और फल-प्रसाद देकर स्वयं को धन्य मान रहे हैं।
श्रद्धालुओं में उमंग, क्षेत्र में भक्ति का वातावरण
पूरे डिंडौरी अंचल में इस परिक्रमा को लेकर गहरी उत्सुकता और आध्यात्मिक वातावरण व्याप्त है। श्रद्धालुओं का मानना है कि धर्मपुरी जी महाराज की यह कठिन साधना माँ नर्मदा की असीम कृपा से अवश्य पूर्ण होगी। यह यात्रा आने वाली पीढ़ियों के लिए यह संदेश छोड़ेगी कि सच्ची भक्ति, दृढ़ निश्चय और आत्मबल के सामने कोई भी बाधा टिक नहीं सकती। निस्संदेह, धर्मपुरी जी महाराज की यह नर्मदा परिक्रमा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि समाज को संयम, त्याग और विश्वास के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देती है।


