डिंडौरी/शैलेश नामदेव/खबर डिजिटल/ जिले में जनसुनवाई की व्यवस्था एक बार फिर लोगों की उम्मीद का आधार बनती दिखाई दे रही है। वर्षों तक चली निष्क्रियता के कारण जनसुनवाई केवल औपचारिकता में बदल गई थी, जिसके चलते लोगों का विश्वास लगभग खत्म हो चुका था। लेकिन जिला कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया के कार्यभार संभालने के बाद यह प्रणाली फिर से सक्रिय, संवेदनशील और प्रभावी होती नजर आ रही है। नई कलेक्टर की त्वरित समाधान शैली, जनहित में तत्पर निर्णय क्षमता, और सहज व्यवहार ने जनता को भरोसे की नई रोशनी दिखाई है। इसी सक्रिय और मानवीय प्रशासनिक छवि का प्रमाण 9 दिसंबर को आयोजित जनसुनवाई में देखने को मिला।
बिझौरी से पहुंचे वृद्ध दम्पति की पीड़ा
ग्राम बिझौरी निवासी लुटैया रौतिया और उनकी पत्नी जनसुनवाई में अपनी आर्थिक दिक्कत और राशन संबंधी समस्या लेकर पहुंचे। दोनों की उम्र अधिक होने के कारण रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी कठिन हो गया था। उनकी व्यथा सुनकर कलेक्टर भदौरिया ने बिना किसी देरी के मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल निर्देश जारी किए।

निर्देश जारी होते ही शुरू हुआ समाधान
कलेक्टर के त्वरित आदेशों के बाद प्रशासनिक अमला तुरंत हरकत में आया और दम्पति की सामाजिक सुरक्षा पेंशन स्वीकृत कर दी गई, जिसके अंतर्गत अब उन्हें 600-600 रुपए प्रतिमाह मिलेंगे। विभाग को उनके लिए अधिक मात्रा में राशन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। चलने-फिरने में दिक्कत को देखते हुए सामाजिक न्याय विभाग द्वारा वॉकिंग स्टिक (छड़ी) उपलब्ध कराई गई। इन सभी कदमों से दम्पति की जीवन-व्यवस्था तत्काल प्रभाव से सुधरने लगी।
आंखों में दिखी राहत, चेहरे पर लौटी मुस्कान
सरकार और जिला प्रशासन की इस मानवता से भरी कार्रवाई ने वृद्ध दम्पति के जीवन में नई उम्मीद जगा दी। समाधान मिलते ही दोनों के चेहरे पर राहत और खुशी साफ दिखाई दे रही थी। दंपति ने कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया एवं जिला प्रशासन के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया और कहा कि “आज हमें विश्वास हुआ कि प्रशासन सच में जनता की सुनता है।”


