डिंडौरी/शैलेश नामदेव/खबर डिजिटल/ लोक निर्माण विभाग द्वारा संचालित मोबाइल एप ‘लोकपथ’ ने जिले में सड़क मरम्मत के प्रति जनभागीदारी और विभागीय दक्षता का नया उदाहरण पेश किया है। डिंडौरी क्षेत्र के एक हिस्से में लंबे समय से पड़े गड्ढों की समस्या को एक स्थानीय नागरिक के द्वारा भेजी गई फोटो-शिकायत के बाद मात्र 24 घंटे के भीतर दुरुस्त कर दिया गया। इससे इलाके के लोगों को तत्काल राहत मिली और दुर्घटना का जोखिम घटा।
मामले का सचित्र विवरण
एक स्थानीय निवासियों ने मोबाइल एप के माध्यम से उस सड़क के खराब हिस्से की तस्वीरें अपलोड कर समस्या की जानकारी दी। शिकायत मिलते ही एप के बैकएंड पर मौजूद मॉनिटरिंग सेल ने यह शिकायत प्राथमिकता में रखकर संबंधित पीडब्ल्यूडी टीम को कार्रवाई हेतु निर्देश भेजे। वहीं, क्षेत्रीय इंजीनियरों ने स्थल का निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मत कार्य के लिए संसाधन मुहैया कराए और मरम्मत का काम शुरू कर दिया। 24 घंटे के अंदर ही गड्ढों को भरकर सड़क को सुचारू आवागमन के योग्य बनाया गया, और मरम्मत के ‘पहले तथा बाद’ की तस्वीरें भी शिकायतकर्ता को भेजी गईं।
विभाग की टिप्पणी
पीडब्ल्यूडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “लोकपथ ऐप के आने से शिकायत निस्तारण में पारदर्शिता और जवाबदेही आई है। जब नागरिक द्वारा फोटो के साथ समस्या बताई जाती है तो हमें वास्तविक स्थिति का तत्काल आभासी प्रमाण मिलता है, जिससे प्राथमिकता और संसाधन तय करना आसान होता है।” उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य में ऐसे त्वरित सुधार कार्यों की निगरानी और तेज करने के लिए और अधिक क्षेत्रीय टीमों की व्यवस्था की जा रही है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों ने विभाग की त्वरित कार्रवाई की सराहना की। एक दुकानदार ने कहा, “पहले शिकायत करने पर महीनों का समय लग जाता था, पर इस बार एक दिन के अंदर ही काम हो गया — इससे हमारे रोजमर्रा के आवागमन और कारोबार पर फर्क पड़ा है।” एक स्कूल टीचर ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा के लिए यह कदम बहुत मायने रखता है, क्योंकि गड्ढों के कारण दुर्घटनाओं का हमेशा खतरा बना रहता था।
तकनीकी और प्रशासनिक पहलू
लोकपथ ऐप शिकायतों को पकड़ने, वर्गीकृत करने और मॉनिटर करने का एक केंद्रीकृत मंच प्रदान करता है। शिकायत के साथ अपलोड की गई तस्वीरों व लोकेशन डेटा के आधार पर टीमों को प्राथमिकता मिलती है। साथ ही, विभाग ने शिकायतों के निपटान के लिए एसएलए (Service Level Agreement) निर्धारित किए हैं, जिनका अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए एक समर्पित मॉनिटरिंग सेल कार्यरत है। मरम्मत के पूरा होने पर ‘पहले/बाद’ के प्रमाण भी प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर दिए जाते हैं, जिससे सार्वजनिक पारदर्शिता बनी रहती है।
पिछला ट्रेंड और क्या बदला है
पूर्व में शिकायतों के निस्तारण में देरी के कई कारण थे। शिकायतों का सही तरह से दर्ज न होना, प्राथमिकता तय करने में धीमापन, मज़बूत निगरानी-कमी और संसाधनों की अनुपलब्धता। स्मार्टफोन-आधारित शिकायत प्रणाली और रियल-टाइम मॉनिटरिंग ने इन बाधाओं को काफी हद तक कम कर दिया है। इसके परिणामस्वरूप न सिर्फ समाधान की गति बढ़ी है बल्कि विभाग पर लोगों का भरोसा भी मजबूत हुआ है।
आगे की रूपरेखा
विभाग ने कहा है कि लोकपथ एप के माध्यम से प्राप्त शिकायतों की समीक्षा कर उनकी प्राथमिकता व वर्गीकरण और बेहतर किया जाएगा, और जहां आवश्यक होगा, वहां स्थायी सुधार व सड़क नवीनीकरण का कार्य भी किया जाएगा। ताकि बार-बार होने वाली मरम्मत की बजाय दीर्घकालिक समाधान मिल सके। साथ ही, नागरिकों को भी तात्कालिक और सटीक जानकारी देने के लिए एप में सूचना-प्रदर्शन को और सरल बनाया जा रहा है।
नागरिकों के लिए संदेश
विभाग ने नागरिकों से अनुरोध किया है कि सड़क संबंधी किसी भी समस्या के समय लोकेशन-सहीता तस्वीरें और संभव हो तो छोटे वीडियो अपलोड करें — इससे समस्या का सही आकलन जल्दी हो सकेगा और मरम्मत तेज़ी से हो पाएगी। डिंडौरी के क्षेत्र का यह ताजा मामला दिखाता है कि टेक्नोलॉजी और सक्रिय प्रशासन मिलकर ग्रामीण व शहरी समस्याओं का त्वरित समाधान कर सकते हैं। लोकपथ एप का प्रयोग बढ़ने से उम्मीद है कि भविष्य में सड़क सुरक्षा, सार्वजनिक सुविधाओं और नागरिक शिकायतों के समाधानों में निरंतर सुधार होगा।


