डिंडौरी/शैलेश नामदेव/खबर डिजिटल/ जिले के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में बिना किसी मान्य मेडिकल डिग्री और डिप्लोमा के झोलाछाप डॉक्टर खुलेआम इलाज कर रहे हैं। बीमार और अनजान ग्रामीण मजबूरी में इनके पास जाते हैं, जबकि ये तथाकथित डॉक्टर न तो प्रशिक्षित हैं और न ही स्वास्थ्य विभाग से मान्यता प्राप्त। अनुभव के नाम पर केवल अन्य झोलाछापों के यहां काम करने का दावा करना, इनका एकमात्र आधार है। ऐसे 13 संदिग्ध चिकित्सकों की सूची तैयार कर बीएमओ समनापुर ने उनसे दस्तावेज मांगे हैं।
कच्चे मकान में चलता था अघोषित ‘क्लिनिक’
समनापुर जनपद पंचायत के गौर कनहारी गांव में राजा दुबे नामक व्यक्ति कई महीनों से स्वयं को डॉक्टर बताकर ग्रामीणों का उपचार कर रहा था। उसका ‘क्लिनिक’ वास्तव में एक कच्चा मकान है, जिसे बाहर से देखने पर सामान्य मकान जैसा ही प्रतीत होता है, लेकिन अंदर दवाइयाँ, इंजेक्शन और मरीजों के बैठने की व्यवस्था नजर आती है।
राजा दुबे का दावा
राजा दुबे का दावा है कि उसने अटल बिहारी विश्वविद्यालय से एक वर्ष का डिप्लोमा किया है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग से अनुमति, रजिस्ट्रेशन और उपचार पद्धति के बारे में पूछे जाने पर वह कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पाया।
निरीक्षण नहीं, झोलाछाप सक्रिय
ग्रामीणों ने बताया कि गांव दूरस्थ होने के कारण स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी निरीक्षण के लिए नहीं पहुंचते। जबकि गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मौजूद है।
दैनिक भास्कर टीम के मौके पर पहुंचने पर स्वास्थ्य केंद्र में महिलाओें और छात्राओं की स्वास्थ्य जांच एवं सिकल सेल स्क्रीनिंग की जा रही थी। संस्था के सदस्यों ने बताया कि समनापुर विकासखंड में 200 से अधिक सिकल सेल मरीज मौजूद हैं।
क्षेत्र में लगभग 13 फर्जी डॉक्टरों की पहचान
बीएमओ डॉ. एस.एस. कुशराम ने बताया कि लगभग 13 फर्जी व झोलाछाप डॉक्टर सक्रिय हैं, जो गलत उपचार कर मरीजों की स्थिति खराब कर देते हैं और उनसे मनमाना शुल्क लेते हैं। इन सभी से डिग्रियों की जांच हेतु दस्तावेज मांगे गए हैं और सूची जिला मुख्यालय भेज दी गई है। विभाग ने सख्त कार्रवाई के संकेत भी दिए हैं।
कानूनी प्रावधान
केवल वही व्यक्ति चिकित्सा अभ्यास कर सकता है जिसका नाम राज्य या राष्ट्रीय मेडिकल रजिस्टर में दर्ज हो। बिना रजिस्ट्रेशन के डॉक्टर बनकर इलाज करना कानूनी अपराध है। दोषी पाए जाने पर जुर्माना, कारावास, या दोनों हो सकते हैं। झोलाछाप डॉक्टर का कोई भी प्रकार का चिकित्सा अभ्यास प्रतिबंधित है। गलत उपचार से यदि मरीज को नुकसान होता है, तो यह गंभीर दंडनीय अपराध है।
ग्रामीणों की मजबूरी
ग्रामीणों की मजबूरी, प्रशासन की पहुंच में कमी और स्वास्थ्य ढांचे की कमजोरियों ने झोलाछाप डॉक्टरों के लिए जमीन तैयार कर दी है। स्वास्थ्य विभाग की त्वरित और सख्त कार्रवाई ही इस अनियमित व अवैध चिकित्सा तंत्र पर रोक लगा सकती है।


