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डिंडौरी की बेटियों का नेशनल में ‘गोल्डन’ धमाका… सेपकटाकरा चैंपियनशिप में जीता स्वर्ण पदक

अब खेलो इंडिया में दिखाएंगी दम

डिंडौरी/शैलेश नामदेव/खबर डिजिटल/5 जनवरी, 2026 डिंडौरी जिले के खेल इतिहास में आज का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया है। जालंधर (पंजाब) में आयोजित 29वीं जूनियर सेपकटाकरा (किक वॉलीबॉल) नेशनल चैंपियनशिप 2025-26 में जिले की दो होनहार बेटियों, देवंती पुषाम और अभिलाषा परस्ते ने शानदार प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतकर मध्य प्रदेश का परचम लहराया है। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही दोनों खिलाड़ियों का चयन आगामी ‘खेलो इंडिया 2026’ के लिए भी हो गया है।

​विजय रथ: झारखंड से बंगाल तक का सफर
​1 जनवरी से 5 जनवरी तक पंजाब के जालंधर में चली इस कड़ी प्रतिस्पर्धा में मध्य प्रदेश की ओर से खेलते हुए कन्या क्रीड़ा परिसर सांदीपनी स्कूल, शहपुरा की इन बालिकाओं ने अद्भुत समन्वय और कौशल का परिचय दिया। ​बालिका डबल इवेंट में प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए देवंती और अभिलाषा ने शुरुआती दौर से ही अपना दबदबा बनाए रखा। टीम डिंडौरी ने पहले राउंड में झारखंड को करारी शिकस्त दी। इसके बाद कड़े मुकाबलों में नागालैंड और उत्तर प्रदेश जैसी मजबूत टीमों को हराकर फाइनल में प्रवेश किया। खिताबी मुकाबले में पश्चिम बंगाल के खिलाफ आक्रामक खेल दिखाते हुए दोनों ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

प्रशासनिक सहयोग और कुशल मार्गदर्शन
​इस सफलता की बुनियाद जिला प्रशासन के सतत सहयोग से रखी गई। कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया एवं सहायक आयुक्त श्री राजेन्द्र जाटव के कुशल निर्देशन में टीम को हर संभव सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। मैदान पर खिलाड़ियों को निखारने का काम कोच श्री आशीष मिश्रा, श्री रामा साहू, श्री अनुज ओझा और श्री विजय शर्मा ने किया। प्रदेश सचिव सेपकटाकरा एसोसिएशन श्री प्रतीक केशरवानी का मार्गदर्शन भी इस जीत में मील का पत्थर साबित हुआ।

​जिले में जश्न का माहौल
​बेटियों की इस स्वर्णिम सफलता की खबर लगते ही जिले के खेल प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई है। बीईओ शहपुरा श्री एम.के. राय, प्राचार्य श्री यशवंत साहू और जिला सेपकटाकरा एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री पी.एस. राजपूत सहित गणमान्य नागरिकों ने इसे महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण प्रतिभाओं की जीत बताया है।​”देवंती और अभिलाषा की यह जीत जिले के अन्य उभरते खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। सीमित संसाधनों के बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण जीतना उनकी कड़ी मेहनत का परिणाम है।”

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