नीमच/ खबर डिजिटल/ दिवाली सीजन में सबसे अधिक भीड़ कपड़ा बाजार में रही। रेडिमेड के ब्रांडेड कपड़ों पर जीएसटी दर घटाने पर सरकार ने खूब प्रचार किया, लेकिन लोगों को इसका फायदा कम दुकानदार ज्यादा उठा गए। बिना बिल के करोड़ों का कारोबार कर गए। ग्राहकों को बिल दिए न ग्राहकों ने बिल लिए।
बाजार में कपड़ा दुकानदारों ने बिना बिल के खूब व्यापार किया। जिस ग्राहक ने बिल मांगा भी तो उसे इनवॉइस निकालकर दे दिया। जिस पर जीएसटी (गुड्स सर्विस टैक्स) नंबर ही नहीं था। जबकि बता दें कि 2500 रुपए तक के कपड़ों पर जीएसटी 12 प्रतिशत से घटकर 5 प्रतिशत कर दिया गया। इससे मध्यम वर्ग को राहत मिलने की बात कही गई। लेकिन त्योहारी सीजन में कपड़ा खरीदने की आपाधापी में ग्राहक बिल नहीं ले रहे थे न दुकानदार बिल देने के मूड़ में दिखे।
बढ़ी हुई जीएसटी दरें
यह सच है कि 2500 तक के कपड़ों पर जीएसटी कम हो गया है, लेकिन 2500 से ऊपर के महंगे कपड़ों पर जीएसटी की दर बढकऱ 18 प्रतिशत हो गई है। ऐसे में महंगे कपड़ों के व्यापारी टैक्स बचाने के लिए बिना बिल का कारोबार करना पसंद करते हैं।
उपभोक्ता को नुकसान
ग्राहक के लिए बिना बिल खरीदारी करना नुकसानदेह हो सकता है। अगर सामान में कोई खराबी निकलती है, तो ग्राहक के पास बिल न होने के कारण कोई सबूत नहीं होता और वह शिकायत नहीं कर सकता।
टैक्स चोरी का मकसद
बिना बिल के कारोबार करने का सबसे बड़ा कारण टैक्स चोरी है। जीएसटी कम होने पर भी अगर व्यापारी बिल नहीं देते हैं, तो वे उस टैक्स राशि को अपनी जेब में रख लेते हैं। इससे सरकार को राजस्व का नुकसान होता है।
वार्षिक टर्नओवर सीमा
जीएसटी विभाग के अनुसार छोटे व्यापारी जिनका वार्षिक टर्नओवर सरकार द्वारा तय की गई सीमा वर्तमान में वस्तुओं के लिए 40 लाख और सेवाओं के लिए 20 लाख से कम होता है, उन्हें जीएसटी के तहत रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं होती है। ऐसे व्यापारी कानूनी रूप से बिना जीएसटी वाले बिल जारी कर सकते हैं या बिना बिल के काम कर सकते हैं।


