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Friday, April 17, 2026
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गूंडा गांव का स्कूल बना खतरे का घर, स्वास्थ्य केंद्र में चल रही कक्षाएं,प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल भवनों की स्थिति है खराब,शिकायत के बाद भी जिम्मेदार नहीं दे रहे ध्यान

उमरियापान/खबर डिजिटल/ एक तरफ सरकार स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की बात कर रही है, डिजिटल क्लासरूम और स्मार्ट एजुकेशन की योजनाएं बनाई जा रही हैं, दूसरी तरफ जमीनी हकीकत यह है कि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को स्कूल में बैठने तक की जगह नसीब नहीं है। शिक्षा विभाग की यह लापरवाही और संवेदनहीनता गंभीर सवाल खड़े करती है। ढीमरखेड़ा तहसील के अंतर्गत आने वाले गूंडा गांव में शिक्षा व्यवस्था की हालत बदहाल हो चुकी है। गांव का प्राथमिक स्कूल जर्जर हालत में पहुंच गया है, जहां बरसात के दिनों में छत से पानी टपकता है, दीवारों में दरारें हैं, और बैठने तक की समुचित व्यवस्था नहीं बची है। बच्चों को न केवल जोखिम में शिक्षा लेनी पड़ रही है, बल्कि उनका मनोबल भी लगातार गिरता जा रहा है। स्कूल भवनों की स्थिति इतनी भयानक हो चुकी है कि स्कूल की कक्षाएं अब गांव के नवीन उप-स्वास्थ्य केंद्र में लगाई जा रही हैं। शाला प्रभारी अशोक कुमार जायसवाल ने बताया कि स्कूल में 130 बच्चे दर्ज हैं। बीते वर्षों से स्कूल भवन जर्जर होने के कारण इस साल से स्वास्थ्य केन्द्र के दो कमरों में कक्षायें लगाते हैं। अनेकों दफा विभागीय अधिकारियों को समस्या से अवगत कराते हुए इस संबंध में पत्राचार किया,लेकिन अब तक समस्या नहीं सुधरी हैं।

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पालकों में आक्रोश, प्रशासन मौन:- ग्रामीणों और पालकों ने कई बार नया भवन निर्माण की मांग की है। ग्राम सभाओं से लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों तक गुहार लगाई गई, लेकिन जिम्मेदारों की नींद नहीं टूटी। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारी सिर्फ आश्वासन देते हैं, लेकिन जमीन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।अब पालकों और ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।सरपंच संकेत लोनी ने भी स्कूल भवन के लिए कलेक्टर, विधायक, सांसद और स्कूल शिक्षा मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक पत्राचार किया है। फिर भी बच्चों को पढ़ाई के लिए स्कूल का नया भवन नसीब नहीं हो सका।

माध्यमिक स्कूल में भर जाता है पानी:- गूंडा गांव के माध्यमिक स्कूल का भवन भी जर्जर हालत में है।कमरों में दरारें है। बारिश के दिनों में ज्यादा समस्या होती है। स्कूल के कमरों से पानी टपकता हैं। छत की प्लास्टर भी नीचे गिरती है। समस्या के चलते बच्चों को न समय पर पढ़ाई मिल रही है, न पाठ्य सामग्री का समुचित उपयोग हो पा रहा है। बरसात के मौसम में जब स्कूल के कमरों में पानी भर जाता है, तब बच्चों को छुट्टी देनी पड़ती है।ऐसे में पढ़ाई का नुकसान तो होता ही है, साथ ही बच्चे मानसिक रूप से भी प्रभावित हो रहे हैं।ढीमरखेड़ा के प्रभारी बीईओ लखन बागरी ने बताया कि गूंडा के दोनों स्कूल भवन जर्जर हो गए।इस संबंध में पूर्व में ही वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी भेजी जा चुकी है।जर्जर भवन होने के कारण प्राथमिक स्कूल की कक्षाएं स्वास्थ्य केंद्र में लग रही हैं।

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