इंदौर/ सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ शहर ने स्वच्छता के साथ-साथ कई रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए हैं। इससे एमपी का सम्मान बढ़ा, तो प्रदेशवासियों को भी नई पहचान मिली। ऐसे में अब इंदौर(indore) ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। इंदौर(indore)अब देश का पहला भिक्षुक मुक्त शहर बन गया है। ये उपलब्धि बनी रहे, इसके लिए जिला प्रशासन ने पूरी तरह से कमर कस ली है। जिला प्रशासन ने भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान को और कड़ाई से लागू करने का निर्णय लिया है। कलेक्टर शिवम वर्मा ने सख्त निर्देश दिए हैं कि शहर में यदि कहीं भी भिक्षुक दिखाई दे तो नागरिक तत्काल सूचना दे और 1 हजार रुपये का इनाम हासिल करें।
शहरभर में प्रशासन की निगरानी
भिक्षुक मुक्त शहर बनाए रखने के लिए प्रमुख स्थलों जैसे खजराना गणेश मंदिर, बड़ा गणपति मंदिर, रेलवे स्टेशन, सत्य साईं चौराहा, मालवा मिल चौराहा सहित अन्य प्रमुख मठ-मंदिरों, आश्रमों और सार्वजनिक स्थलों पर विशेष निगरानी की व्यवस्था की जाएगी। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि यदि इन स्थानों पर कोई व्यक्ति भिक्षा मांगता दिखाई दे, तो वे तुरंत निर्धारित हेल्पलाइन नंबर पर इसकी जानकारी दें। वहीं सूचना की पुष्टि होने पर संबंधित नागरिक को पुरस्कार दिया जाएगा।
भिक्षुकों के पुनर्वास पर भी जोर
जानकारी के मुताबिक, पिछले अभियान के दौरान 4 हजार 500 लोगों को भिक्षावृत्ति से मुक्ति दिलाई गई, जिनमें से 800 का सफलतापूर्वक पुनर्वास किया गया। इनमें 115 बच्चे और किशोर शामिल हैं। इसके अलावा, भीख मांगने वाले 172 बच्चों को विभिन्न स्कूलों में प्रवेश भी दिलवाया गया है, ताकि वो शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ सके।
भिक्षा मांगने के कारणों का निदान
कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश है कि भिक्षावृत्ति करने वाले लोगों को आत्मनिर्भर बनाया जाए, उनकी काउंसलिंग कर उन्हें रोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसरों से जोड़ा जाए। वहीं नशे की लत के कारण भी कई लोग इस काम में लगे हैं, उनकी आपराधिक पृष्ठभूमि का खंगाल कर उचित परामर्श के साथ सुधार गृह भेजकर पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
कलेक्टर शिवम वर्मा ने बैठक में दिए निर्देश
कलेक्टर शिवम वर्मा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में भिक्षुक मुक्त इंदौर की पहचान को स्थायी रूप से बनाए रखने हेतु एक व्यापक रणनीति तैयार की गई। इस मौके पर कलेक्टर वर्मा ने कहा, स्वच्छता के साथ-साथ सामाजिक स्वच्छता भी हमारी प्राथमिकता है। भिक्षुक मुक्त इंदौर की पहल एक संवेदनशील और आत्मनिर्भर समाज के निर्माण की दिशा में सार्थक कदम है।


