मध्यप्रदेश के जबलपुर की मदन महल पहाड़ियों का पर्यावरण एक बार फिर सुर्खियों में है. यहां के शैलपर्ण उद्यान और देवताल क्षेत्र के पास पर्यावरण विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने दुनिया के बड़े मशरूमों में गिने जाने वाले बोंडारजेविया बर्कलेई को खोजा है. यह मशरूम आमतौर पर उत्तरी अमेरिका और एशिया के कुछ चुनिंदा हिस्सों में ही पाया जाता है, इसलिए जबलपुर में इसकी मौजूदगी ने जैव विविधता से जुड़े लोगों को हैरान कर दिया है. हालांकि विशेषज्ञों ने साफ चेतावनी दी है कि किसी भी जंगली मशरूम को बिना पहचान और सलाह के खाना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि कई जहरीले मशरूम इसके जैसे दिखते हैं. यह खोज इस बात का संकेत भी है कि मदन महल की पहाड़ियों की मिट्टी और जलवायु काफी समृद्ध हैं.
एमपी के इस जगह में मिला दुनिया का सबसे बड़ा मशरूम
वनस्पति विज्ञान के जानकारों के मुताबिक, यह मशरूम आमतौर पर पुराने ओक जैसे कठोर पेड़ों की जड़ों या उनके ठूंठ के पास उगता है. मदन महल क्षेत्र में भी इसे इसी तरह के पेड़ों के आसपास देखा गया है. शुरुआत में यह पेड़ों पर परजीवी की तरह असर डालता है और बट रॉट नामक सड़न पैदा करता है, लेकिन पेड़ के सूख जाने के बाद भी यह वहीं विकसित होता रहता है. इससे लकड़ी के अपघटन और मिट्टी को पोषक तत्व लौटाने की प्रक्रिया में इसकी अहम भूमिका मानी जाती है. इस तरह की प्रजाति का यहां मिलना इलाके की समृद्ध जैव विविधता को दर्शाता है.
इतना बड़ा होता है मशरूम
इस मशरूम की पहचान उसका बड़ा आकार और खास बनावट है. इसे खोजने वाले पर्यावरणविद् माधव नामदेव के अनुसार, इसे बर्कले का पॉलीपोर भी कहा जाता है. इसका आकार काफी बड़ा होता है और इसका फैलाव 50 से 100 सेंटीमीटर तक हो सकता है. यह कई परतों या पंखुड़ियों के गुच्छे की तरह दिखाई देता है, जिसका रंग क्रीम, हल्का भूरा या मटमैला होता है. इसकी सतह पर गोल-गोल घेरों जैसे पैटर्न बने होते हैं, जो इसे बाकी मशरूमों से अलग पहचान देते हैं. जहां तक इसके उपयोग की बात है, तो यह खाने योग्य माना जाता है, लेकिन सही समय पर ही. जब यह छोटा और ताजा होता है, तब इसे पकाकर खाया जा सकता है और इसका स्वाद हल्का अखरोट जैसा महसूस होता है. जैसे-जैसे यह बड़ा होता जाता है, इसकी बनावट सख्त और रेशेदार हो जाती है, साथ ही स्वाद भी कड़वा होने लगता है. ऐसे में इसे खाना न सिर्फ मुश्किल होता है बल्कि यह पेट से जुड़ी समस्याएं भी पैदा कर सकता है.
यह भी पढ़ें-इस देश में टॉयलेट सीट की होती है पूजा, जानें हैरान कर देने वाली कहानी
यह भी पढें-New COVID Variant BA.3.2 Cicada: फिर कोरोना की एंट्री, जानें लक्षण और बचाव के तरीके
यह भी पढें-MP Pension Scheme: 55 लाख लोगों की बल्ले-बल्ले! सरकार ने ट्रांसफर किए करोड़ों रुपये, चेक करें अपना नाम
यह भी पढ़ें-MP में बिजली ने रुलाया, हुई इतनी महंगी, 1 अप्रैल से लगेगा झटका


