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67वां अखिल भारतीय कालिदास समारोह 1 से 7 नवम्बर तक: परंपरा, नवाचार और संस्कृति का संगम बनेगा उज्जैन

Kalidas Samaroh Ujjain 2025: नवाचार एवं लोकप्रिय आकर्षणों से सजेगा देश का प्रतिष्ठित सांस्‍कृतिक अनुष्‍ठान

भोपाल/उज्‍जैन। 67th All India Kalidas Samaroh किसी भी कार्यक्रम का छह दशकों से भी अधिक तक निरन्‍तर अपनी परम्‍परा एवं प्रतिष्‍ठानुसार आयोजित होना उसके महत्‍व, लोकप्रियता एवं प्रासंगिकता को दर्शाता है। उज्‍जैन में 66 वर्ष पूर्व 1958 से प्रारंभ हुआ अखिल भारतीय कालिदास समारोह का क्रम अनवरत अपने 67वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। यह सफलता जितनी आयोजकों की है, उतनी ही कलाकारों, कला मर्मज्ञों, कला रसिकों एवं उज्‍जैनवासियों की भी है।

पराम्परानुसार इस वर्ष भी कालिदास संस्‍कृत अकादमी, मध्‍यप्रदेश संस्‍कृति परिषद्, मध्‍यप्रदेश संस्‍कृति विभाग द्वारा 67वें अखिल भारतीय कालिदास समारोह – 2025 का आयोजन दिनांक 30 अक्टूबर से 7 नवम्बर, 2025 तक उज्‍जैन में होने जा रहा है। अपने 67वें वर्ष में यह समारोह अनेक नवाचारों, लोकप्रिय आकर्षणों एवं परम्परा के अनुसार नई पीढ़ी की सहभागिता के साथ सम्पन्न होने जा रहा है।

उक्त जानकारी देते हुए कालिदास संस्कृत अकादमी के निदेशक डॉ. गोविन्द गन्धे ने बताया कि देवप्रबोधनी एकादशी अर्थात 01 नवम्बर से पूर्व 30-31 अक्टूबर, 2025 पूर्वरंग सम्पन्न होगा। पूर्वरंग के अन्तर्गत 30 अक्टूबर 2025 को माँ गढ़कालिका पर वागर्चन में शहर के विद्यालय, महाविद्यालय तथा गुरुकुल के 1100 बटुकों, छात्र-छात्राओं के द्वारा श्यामलादंडकम् एवं देवी स्तुति की प्रस्तुति दी जायेगी। इस अवसर पर नृत्याराधना नृत्य मंदिर संस्थान, उज्जैन द्वारा देवी स्तुति में नृत्य आराधना भी की जायेगी।

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31 अक्टूबर, 2025 को पारम्परिक कलश यात्रा का आयोजन होगा। रामघाट पर तीर्थ पूजन तथा महाकाल के आशीर्वाद के पश्चात विभिन्न मार्गों गुदरी चौराहा, पटनी बाजार, गोपाल मन्दिर, सर्राफा, कण्ठाल, नई सड़क, फव्वारा चौक, दौलतगंज, मालीपुरा, देवास गेट, टॉवर चौराहा, शहीद पार्क, ढक्कन वाला कुँआ, गुरुद्वारा, माधव नगर थाने के सामने, दशहरा मैदान चौराहा, संजीवनी हॉस्‍पीटल के सामने से होते हुए अकादमी परिसर में मंगल कलश की स्थापना होगी। कलश यात्रा में आकर्षण छतीसगढ़ का पंथी नृत्य, नासिक के ढोल-ताशे, विद्यालयों के घोष पथक, म.प्र. पुलिस बैंड, लोककलाकारों के नृत्य तथा गणमान्य नागरिक रहेंगे।

टॉवर चौक स्थित मंच पर विविध कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे फिर वे भी कलश यात्रा में सम्मिलित होंगे। शहर के विभिन्न संगठनों द्वारा शहर के विभिन्न मार्ग पर कलश यात्रा का स्वागत किया जायेगा। इसी दिन सायंकाल रत्नागिरी महाराष्ट्र के युवा कलाकारों के द्वारा वाद्यवृंद समूह के साथ संस्कृत आर्केस्ट्रा की प्रस्तुति होगी। इस वर्ष युवाओं के द्वारा इस समारोह में यह नवाचार होगा। महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा आधुनिक वाद्य यन्त्रों के साथ आकर्षक धुनों पर संस्कृत गीतों की प्रस्तुति दी जायेगी।
इसके पूर्व उज्जैन शहर एवं जिले के विभिन्न विद्यालयों, गुरुकुलों और महाविद्यालय के 1100 छात्र-छात्राओं द्वारा कालिदास की रचनाओं के मंगलाचरण के श्‍लोकों का सामूहिक पाठ किया जायेगा।

उज्जैन में 1 से 7 नवम्बर तक आयोजित होने जा रहा है 67th All India Kalidas Samaroh 67वां अखिल भारतीय कालिदास समारोह

1 नवम्बर, 2025
शुभारंभ प्रातः 10:00 बजे माननीय अतिथियों, गणमान्‍य नागरिकों एवं कला-साहित्‍य प्रेमियों की उपस्थिति में समपन्‍न होगा। सायंकाल भक्ति संगीत के कार्यक्रम में सुगम एवं भक्ति संगीत की प्रस्तुति राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त गायिका सुश्री सूर्यागायत्री, कालीकट (केरल) की सुगम एवं भक्ति संगीत की प्रस्तुति होगी।

2 नवम्बर, 2025
प्रातः 9:00 बजे सारस्वत आयोजन की श्रृंखला के अन्तर्गत कालिदास साहित्य में स्व-बोध विमर्श विषय पर शोध संगोष्ठी का शुभारम्भ होगा। सायं 5:00 बजे व्याख्यान माला ‘संस्कृति चिन्तक कालिदास‘ विषय पर प्रो. प्रगाग नारायण मिश्र, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज मुख्य वक्ता के रूप में व्याख्यान देंगे। सांस्कृतिक सत्र में अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शास्त्रीय गायक श्री महेश काळे की प्रस्तुति होगी।

3 नवम्बर, 2025
प्रातः 9:00 बजे सारस्वत आयोजन की श्रृंखला के अन्तर्गत कालिदास साहित्य में स्व-बोध विमर्श विषय पर शोध संगोष्ठी होगा। सायं 5:00 बजे व्याख्यान कालिदास का परिवार चिन्तन विषय पर प्रो. राजेश्वर मिश्र, वरिष्ठ संस्कृत विद्वान्, कुरुक्षेत्र मुख्य वक्ता के रुप में व्याख्यान देंगे। सांस्कृतिक सत्र में सुश्री अनन्या गौड (बैंगलोर) शास्त्रीय नृत्य कथक, शास्त्रीय नृत्य नाटिका शकुन्तला – सुश्री अमिता खरे, भोपाल एवं शास्त्रीय नृत्य नाटिका ऋतुसंहार – कलाकार सांस्‍कृतिक समिति, उज्जैन की प्रस्तुति होगी।

4 नवम्बर, 2025
प्रातः 9:00 बजे सारस्वत आयोजन की श्रृंखला के अन्तर्गत कालिदास साहित्य में स्व-बोध विमर्श विषय पर शोध संगोष्ठी होगी। सांय 5:00 बजे व्याख्यान ‘‘कालिदास का स्वात्म गौरव‘‘ विषय पर प्रो. सनन्दन त्रिपाठी, नई दिल्ली मुख्य वक्ता के रूप में व्याख्यान देंगे। सांस्कृतिक सत्र में हिन्दी नाटक श्रीकृष्ण उज्जैनी – श्री विशाला सांस्कृतिक लोकहित समिति, उज्जैन की प्रस्तुति होगी।

5 नवम्बर, 2025
प्रातः 9:00 बजे सारस्वत आयोजन की श्रृंखला के अन्तर्गत ‘‘ऑपरेशन सिन्‍दूर के आलोक में कालिदास‘‘ विषय पर कविसमवाय होगा। सांस्कृतिक सत्र में संस्कृत नाटक शिवभाणकम् निर्देशन – श्री पियाल भट्टाचार्य, कोलकाता की प्रस्तुति होगी।

6 नवम्बर, 2025
सांस्कृतिक सत्र में शास्त्रीय वादन पंचनाद – सुश्री श्रुति अधिकारी, भोपाल एवं शास्त्रीय वादन वायोलिन – सुश्री दुर्गा शर्मा, बैंगलोर की प्रस्तुति होगी। 6 नवम्बर, 2025 को क्षेत्रीय बोली/भाषा का कवि सम्मेलन आयोजित होगा।

7 नवम्बर, 2025
सांस्कृतिक सत्र में शास्त्रीय गायन – सुश्री दिव्या शर्मा जांगीड़, मुरैना एवं लोकगायन – श्री प्रेमसिंह देपालपुरिया, सांरगपुर की प्रस्तुति होगी। समारोह का समापन एवं पुरस्कार वितरण प्रदेश के माननीय राज्यपाल श्री मंगूभाई पटेल के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न होगा। प्रातः कालीन सभा में भी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होगी।

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संस्‍कृत शब्‍दावली की प्रदर्शनी सहित चार प्रदर्शनियां
अखिल भारतीय कालिदास समारोह के अवसर पर अकादमी परिसर में चार प्रदर्शनियाँ संयोजित की जा रही हैं। यह पहला अवसर होगा की समारोह के दौरान सम्पूर्ण परिसर में एक साथ चार प्रदर्शनियों का भिन्न-भिन्न अवलोकन दर्शक कर सकेंगे। यह जानकारी अकादमी के निदेशक डॉ. गोविन्द गन्धे ने देते हुए बताया कि प्रतिवर्ष राष्ट्रीय कालिदास चित्र एवं मूर्तिकला प्रदर्शनी का आयोजन किया जाता था। इस वर्ष इस प्रदर्शनी के साथ ही अन्य प्रदर्शनियाँ भी परिसर में संयोजित की जा रही हैं।

परिसर के मुख्य द्वार पर ही संस्कृत भारती के समन्वय से हमारे दैनिक व्यवहार के लिए उपयोगी संस्कृत शब्दावली की प्रदर्शनी, वस्तुओं, चित्रों, चार्ट, पुस्तकें आदि से युक्त प्रदर्शनी रहेगी। इस प्रदर्शनी के माध्यम से दर्शकों को दैनिक जीवन में सरल संस्कृत के प्रयोग को अपनाने में सरलता होगी।

तृतीय प्रदर्शनी अकादमी द्वारा प्रकाशित संस्कृत, हिन्दी, मालवी के दुर्लभ ग्रन्थ के प्रकाशन की रहेगी। इस प्रदर्शनी में पाठक अपनी पसन्द की पुस्तकें क्रय कर सकेंगे। इसी श्रृंखला में अकादमी द्वारा समारोह के विगत 10 वर्षों में समारोह में पुरस्कृत चित्रों की प्रदर्शनी देखने को मिलेगी। इसी के साथ उज्जैन तथा मालवा पर केन्द्रित पुरातत्व एंव प्राचीन सिक्कों, चित्रों मुद्राओं की प्रदर्शनी संयोजित की जा रही है।

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