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:—बिना ठोस सबूत कार्रवाई के आरोप, 10 दिन बाद भी CWC में रोके गए बच्चे; जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग तेज
खबर डिजिटल कटनी –मध्यप्रदेश के कटनी रेलवे स्टेशन पर मानव तस्करी की आशंका के नाम पर की गई कार्रवाई अब गंभीर विवाद का विषय बन गई है। आरोप है कि 11 अप्रैल 2026 को पटना–पुणे एक्सप्रेस (17609) से यात्रा कर रहे करीब 167 बच्चों को बिना पर्याप्त जांच और ठोस प्रमाण के ट्रेन से उतार लिया गया।बताया जा रहा है कि ये सभी बच्चे बिहार के अररिया और सुपौल जिले के निवासी हैं, जो महाराष्ट्र के लातूर स्थित मदरसों में शिक्षा प्राप्त करने जा रहे थे। बच्चों के साथ आठ शिक्षक भी मौजूद थे। बावजूद इसके, पुलिस द्वारा मानव तस्करी की आशंका जताते हुए उन्हें कटनी स्टेशन पर रोक लिया गया और तत्काल एफआईआर दर्ज कर दी गई।आरोपों के घेरे में कार्रवाईसंगठनों का आरोप है कि यह पूरी कार्रवाई गलत सूचना के आधार पर की गई। उनका कहना है कि बच्चों के पास वैध टिकट थे और वे अपने परिजनों की सहमति से यात्रा कर रहे थे। अन्य स्टेशनों—पटना, मिर्जापुर और सतना—पर जांच के बाद उन्हें यात्रा की अनुमति दी गई थी, लेकिन कटनी में अचानक यह कार्रवाई की गई।बच्चों को अलग-अलग भेजा गयाकार्रवाई के बाद बच्चों को दो हिस्सों में बांट दिया गया—कुछ को कटनी और बाकी को जबलपुर की चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) में भेज दिया गया। आरोप है कि 10 दिन बीत जाने के बाद भी बच्चों को परिजनों को नहीं सौंपा गया है, जबकि कई अभिभावक स्वयं आकर दस्तावेज और शपथ पत्र प्रस्तुत कर चुके हैं।परिजनों में नाराजगी, प्रशासन पर सवालपरिजनों और संबंधित संगठनों का कहना है कि कानून के अनुसार ऐसी स्थिति में 24 घंटे के भीतर परिवार को सूचना देना और सत्यापन के बाद बच्चों को सौंपना आवश्यक है, लेकिन यहां प्रक्रिया में देरी और संवेदनशीलता की कमी दिखाई दे रही है।ज्ञापन सौंपकर की गई मांगइस पूरे मामले को लेकर संबंधित संगठनों ने रेलवे सुरक्षा बल (RPF), जीआरपी और CWC को ज्ञापन सौंपकर बच्चों को तत्काल रिहा कर सुरक्षित परिजनों तक पहुंचाने की मांग की है। साथ ही, बिना पर्याप्त जांच कार्रवाई करने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की भी मांग उठाई गई है।प्रशासन की चुप्पीफिलहाल इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे विवाद और गहरा गया है।निष्कर्ष:कटनी में बच्चों को मानव तस्करी के शक में रोके जाने का मामला अब संवेदनशील और विवादित बन चुका है। एक ओर सुरक्षा एजेंसियां अपनी कार्रवाई को सही ठहरा सकती हैं, वहीं दूसरी ओर बिना पुख्ता सबूत बच्चों को रोके रखना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
सौरभ श्रीवास्तव खबर डिजिटल संवाददाता कटनी मो. 9131308097
