Digital License: मध्य प्रदेश में परिवहन विभाग की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं. साल 2024 में स्मार्ट चिप बनाने वाली कंपनी का कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के बाद से ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन रजिस्ट्रेशन के फिजिकल कार्ड बनना बंद हो गए हैं. इसके बावजूद विभाग आवेदकों से कार्ड के नाम पर शुल्क ले रहा है और उन्हें सिर्फ डिजिटल लाइसेंस और आरसी उपलब्ध कराई जा रही है.
फिजिकल कार्ड बनना हुआ बंद
जानकारी के मुताबिक, ठेका खत्म होने के बाद अब तक नई कंपनी के साथ कोई नया अनुबंध नहीं हो पाया है. ऐसे में फिलहाल विभाग डिजिटल दस्तावेज ही जारी कर रहा है, जिन्हें लोग मोबाइल ऐप या प्रिंट के जरिए इस्तेमाल कर रहे हैं. इस व्यवस्था को लेकर पहले भी आपत्ति जताई जा चुकी है. तत्कालीन अपर परिवहन आयुक्त उमेश जोगा ने शासन को पत्र लिखकर सुझाव दिया था कि जब तक फिजिकल कार्ड उपलब्ध नहीं कराए जा रहे, तब तक स्मार्ट कार्ड का शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए. लेकिन इस प्रस्ताव पर अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया है.
ग्वालियर में हर दिन आते हैं कई आवेदन
ग्वालियर में हर दिन करीब 250 नए ड्राइविंग लाइसेंस के आवेदन आते हैं, वहीं आरसी से जुड़े सैकड़ों मामलों का भी रोजाना निपटारा होता है. ऐसे में बड़ी संख्या में लोग डिजिटल दस्तावेजों पर ही निर्भर हैं, जबकि उनसे कार्ड शुल्क भी वसूला जा रहा है. आवेदकों का कहना है कि जब उन्हें कार्ड मिल ही नहीं रहा, तो शुल्क लेना गलत है.
फिजिकल कार्ड न मिलने के कारण लोगों को अपने लाइसेंस और आरसी का प्रिंट खुद ही निकलवाना पड़ रहा है. इसके लिए उन्हें साइबर कैफे या प्रिंटिंग सेंटर का सहारा लेना पड़ता है, जिससे अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ता है. ऐसे में कार्ड शुल्क के साथ यह अतिरिक्त खर्च लोगों को दोहरी परेशानी दे रहा है.
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