सतना/अंकित शर्मा/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश की सियासत में इस वक्त एक ही मुद्दे की गूंज है, बीजेपी हो या फिर कांग्रेस पार्टी, सभी राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी पर ही बयानबाजी करते नजर आ रहे हैं। बीजेपी बैकफुट पर नजर आ रही है, तो कांग्रेस फ्रंटफुट पर आकर इस मुद्दे को भुनाने में लगी है। कहने को तो मंत्री प्रतिमा बागरी का विवादों से पुराना नाता रहा है, लेकिन उनका संघर्ष भी बेहद खास है, क्योंकि एक संगठन के पद से आगे बढ़ने वाली महिला नेत्री प्रदेश के मंत्री पद पर काबिज हुई, वो भी महज पहली बार विधायक बनने के बाद, ये उनकी काबिलियत को भी दर्शाता है।

जमीनी स्तर से सत्ता का सफर
प्रतिमा बागरी का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प रहा है। वे कोई पैराशूट लैंडिंग वाली नेता नहीं मानी जातीं है, बल्कि संगठन में काम करके मंत्री पद तक पहुंची हैं, जबकि उनका परिवार भी बीजेपी से जुड़ा रहा है। दरअसल प्रतिमा बागरी ने राजनीति की शुरुआत जमीनी स्तर से की, वे भाजपा महिला मोर्चा में महामंत्री रहने के साथ संगठन में अन्य पदों पर रहीं। रैगांव विधानसभा सीट पर भाजपा के दिग्गज नेता जुगल किशोर बागरी के निधन के बाद 2021 में उपचुनाव हुआ तो तब प्रतिमा बागरी को बीजेपी ने टिकट दिया, उस चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा और कांग्रेस की कल्पना वर्मा जीती थीं।
36 हजार वोटों से जीता चुनाव
साल 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने युवा और शिक्षित चेहरे के तौर पर प्रतिमा बागरी पर दांव खेला। उनका मुकाबला कांग्रेस की तत्कालीन विधायक कल्पना वर्मा से था। प्रतिमा ने यह चुनाव 36 हजार से अधिक वोटों के बड़े अंतर से जीता और पहली बार विधायक बनीं। उनकी जीत इतनी शानदार थी और बुंदेलखंड-विंध्य क्षेत्र में एक युवा महिला चेहरे की जरूरत को देखते हुए पार्टी ने उन्हें पहली ही बार में डॉ. मोहन यादव के मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया।
पारिवारिक पृष्ठभूमि और शिक्षा
प्रतिमा बागरी सतना जिले की ही रहने वाली हैं। वे एक शिक्षित राजनेता हैं। उनके पास मास्टर ऑफ सोशल वर्क और कानून (Law) की डिग्री है। राजनीति में आने से पहले वे सामाजिक कार्यों में सक्रिय थीं। उनका परिवार भी भाजपा से जुड़ा रहा है, लेकिन मुख्य धारा की राजनीति में पहचान प्रतिमा ने ही बनाई।
विवादों से रहा पुराना नाता
राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी का विवादों से पुराना नाता रहा है, उनके चुनाव जीतने के बाद उन पर आरोप लगा था कि बागरी का जाति प्रमाण पत्र फर्जी है, लेकिन अब यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इसी तरह उनके पति पर भी आरोप लगा था कि उन्होंने सरकारी जमीन को औने-पौने दाम पर लीज पर लेकर निजी लोगों को मनमाने दाम पर लीज पर दिया था। अन्य आरोपों में उन पर जमीनों पर कब्जा करने का भी आरोप लगा था।
मुख्य आरोपों से अब बढ़ी मुश्किल
अभी कुछ दिनों पहले ही मंत्री प्रतिमा बागरी के बहनोई पर सिंहपुर थाने में एनडीपीएस का मामला दर्ज हुआ था, उन्हें नशीली कफ सिरप की तस्करी के मामले में गिरफ्तार किया गया था, जिनसे करीब 35 लाख रुपये की कफ सिरप बरामद की गई थी, वहीं कुछ वर्षों के भीतर करोड़ों की खरीदी और बिक्री का करीब 5 करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन भी पाया गया था। जिसके बाद उन्हें जवाब देना महंगा पड़ गया था।
अब जाकर गले की फांस बना भाई
8 दिसंबर 2025 को मंत्री प्रतिमा बागरी के भाई अनिल बागरी को रामपुर बघेलान पुलिस ने 46 किलो गांजे के साथ गिरफ्तार किया था, जिसके बाद सियासी हलकों में खलबली मच गई। वहीं उसके बाद आरोप लगने लगे कि जीजा और साला मिलकर नशीले पदार्थों का अंतर्राज्यीय गिरोह चला रहे थे। वहीं जब उनसे मीडियाकर्मियों ने गांजा तस्करी के आरोप में उनके भाई अनिल बागरी की गिरफ्तारी को लेकर सवाल किया। उन्होंने तल्ख लहजे में पत्रकारों को फटकारते हुए कहा, जबरदस्ती की बात क्यों करते हो तुम लोग?”
पार्टी आलाकमान को करना है निर्णय
मंत्री प्रतिमा बागरी अपने ताजा बयानों में गांजा तस्करी में पकड़ाए अनिल बागरी को भाई मानने से ही इंकार कर रही है, लेकिन अब सारा मामला भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष तक पहुंच चुका है। माना जा रहा है कि इसके परिणाम आने वाले वक्त में साफ दिख जाएंगे, क्योंकि इस मुद्दे से कांग्रेस को बैठे-बिठाए एक महत्वपूर्ण मुद्दा मिल गया है, जिसके जरिए वो बीजेपी को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रही, और बीजेपी के नेता जवाब देने की बजाय बगले झांकते नजर आ रहे हैं।


