मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों निगम-मंडलों और प्राधिकरणों में होने वाली नियुक्तियों को लेकर हलचल तेज हो गई है. खासतौर पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की सक्रियता ने इस मुद्दे को और ज्यादा चर्चा में ला दिया है. बताया जा रहा है कि राज्य में होने वाली इन राजनीतिक नियुक्तियों में वे अपने कुछ खास समर्थकों को महत्वपूर्ण पद दिलाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं.
निगम-मंडलों की नियुक्तियों में ज्योतिरादित्य सिंधिया की सक्रियता
सूत्रों के मुताबिक, सिंधिया पांच ऐसे नेताओं के नाम पर विशेष जोर दे रहे हैं, जिन्हें वे निगम-मंडलों या अन्य संस्थाओं में मंत्री स्तर का दर्जा दिलाना चाहते हैं. इन नामों में इमरती देवी, महेंद्र सिंह सिसोदिया, ओपीएस भदौरिया, गिरिराज दंडोतिया और मुन्नालाल गोयल शामिल बताए जा रहे हैं. कहा जा रहा है कि इन नेताओं को उचित पद दिलाने के लिए सिंधिया दिल्ली से लेकर भोपाल तक लगातार लॉबिंग कर रहे हैं. दरअसल, ये सभी नेता वे हैं जिन्होंने राजनीतिक रूप से कठिन समय में सिंधिया का साथ दिया था. जब उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का रुख किया, तब ये नेता भी उनके साथ खड़े रहे. इसी वजह से सिंधिया अब उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहते और चाहते हैं कि उन्हें सरकार या संगठन में सम्मानजनक भूमिका मिले.
माना जा रहा है कि यही वजह है कि प्रदेश में निगम-मंडलों और प्राधिकरणों में नियुक्तियों की प्रक्रिया में देरी हो रही है. हालांकि निकायों में एल्डरमैन की पहली सूची पहले ही जारी की जा चुकी है, लेकिन बाकी महत्वपूर्ण पदों पर अभी भी फैसला लंबित है. ऐसे में राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि अंतिम सूची जारी होने से पहले सभी गुटों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश चल रही है. दूसरी तरफ, विपक्ष इस पूरे मामले को लेकर सरकार पर निशाना साध रहा है. कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा के भीतर आपसी खींचतान के चलते नियुक्तियों में देरी हो रही है. विपक्ष इसे सत्ता के अंदर चल रही अंदरूनी राजनीति और संतुलन की लड़ाई के रूप में पेश कर रहा है.
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