हरदा/ नौशाद खान/ खबर डिजिटल/ हरदा और सीहोर जिलों में इन दिनों नर्मदा नदी से अवैध रेत खनन और परिवहन का खेल खुलेआम चल रहा है। नर्मदा पार का क्षेत्र सीहोर जिले में आता है, जहां से ठेकेदार बड़े पैमाने पर रेत का उत्खनन कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि ठेकेदार एक हजार घन मीटर के हिसाब से रॉयल्टी ले रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर इससे कहीं अधिक रेत निकाली और बेची जा रही है।
ट्रैक्टर-ट्रॉलियां का कमर्शियल रजिस्ट्रेशन नहीं
प्रतिदिन 200 से 300 ट्रैक्टर-ट्रॉलियां ओवरलोड रेत भरकर सड़कों पर दौड़ रही हैं। ट्रैक्टर-ट्रॉली को कृषि कार्य के लिए टैक्स में छूट दी जाती है, लेकिन इन्हें व्यावसायिक उपयोग में लाया जा रहा है। परिवहन विभाग के रिकॉर्ड में एक भी ट्रैक्टर-ट्रॉली का कमर्शियल रजिस्ट्रेशन दर्ज नहीं है। नियम के अनुसार व्यावसायिक उपयोग के लिए वाहन की कीमत का 10 प्रतिशत वार्षिक टैक्स देना अनिवार्य है। इस अनदेखी से शासन को करोड़ों रुपये का राजस्व नुकसान हो रहा है।
ट्रॉलियों को मोडिफाई कर बनाया डंपर
जिले में कई ट्रॉलियों को अवैध रूप से मोडिफाई कर डंपर का रूप दे दिया गया है। जहां सामान्य ट्रॉली में लगभग एक घन मीटर रेत भरी जाती है, वहीं संशोधित ट्रॉली में छह घन मीटर तक रेत भरी जा रही है। कई वाहनों पर नंबर प्लेट तक नहीं है, जिससे दुर्घटना या जांच की स्थिति में कार्रवाई मुश्किल हो जाती है।
विभागीय उदासीनता पर सवाल
रेत से भरे ओवरलोड वाहन थानों, कलेक्ट्रेट और आरटीओ कार्यालय के सामने से गुजरते हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं होती। परिवहन और यातायात विभाग की चेकिंग के बावजूद इस कारोबार पर रोक नहीं लग पा रही है। आरटीओ राकेश कुमार अहाके ने जानकारी मिलने पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।


