निवाड़ी (मध्यप्रदेश) Khabar digital। जिले में पेयजल, स्वच्छता और हाइजीन (WASH) सेवाओं को और अधिक प्रभावी व सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से गुरुवार को शीला पैलेस होटल में एक दिवसीय जिला स्तरीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। परमार्थ समाजसेवी संस्था द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में प्रशासनिक अधिकारियों, विषय विशेषज्ञों और विभिन्न हितधारकों ने शिरकत की, जहाँ जल गंगा संवर्धन अभियान और स्थायी स्वच्छता प्रणालियों पर गहन मंथन हुआ।
कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद डिप्टी कलेक्टर मनीषा जैन ने कहा कि जल संरक्षण के क्षेत्र में सामाजिक संस्थाओं का प्रयास सराहनीय है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि शासन और प्रशासन के समन्वय से जिले में जल स्रोतों के पुनर्जीवन और संरक्षण के कार्य को नई गति मिलेगी।
वहीं, डिप्टी कलेक्टर स्वाति सिंह ने स्वच्छता को स्वास्थ्य से जोड़ते हुए कहा, “करीब 40 प्रतिशत बीमारियां केवल अस्वच्छता के कारण पनपती हैं। स्वच्छ जीवनशैली को अपनाना किसी विकल्प की तरह नहीं, बल्कि एक अनिवार्य जिम्मेदारी की तरह देखा जाना चाहिए।”
जनपद पंचायत की सीईओ वंदना कैथल ने प्रदेश व्यापी ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ का उल्लेख करते हुए इसे जनआंदोलन बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पानी प्रकृति का वह उपहार है जिसे बनाया नहीं जा सकता, केवल सहेज कर भविष्य को सुरक्षित किया जा सकता है। उन्होंने प्रत्येक नागरिक से अपने घरों में ‘रेन वाटर हार्वेस्टिंग’ अपनाने का संकल्प लेने की अपील की।
तकनीकी सत्र और रणनीतिक चर्चा
कार्यशाला के दौरान डब्ल्यूएचएच (WHH) दिल्ली से आए प्रतिनिधि संजीव ने ‘WASH-SSI’ प्रोजेक्ट के तहत एक तकनीकी प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि कैसे विभिन्न सरकारी विभागों के साथ बेहतर समन्वय और सिस्टम आधारित दृष्टिकोण अपनाकर ग्रामीण स्तर पर स्थायी बदलाव लाए जा सकते हैं।परमार्थ संस्था के सचिव डॉ. संजय सिंह ने विजन साझा करते हुए कहा कि यदि जिला प्रशासन से लेकर ग्राम स्तर तक सभी विभाग और समुदाय एकजुट होकर कार्य करें, तो निवाड़ी जल और स्वच्छता के क्षेत्र में देश के लिए एक ‘मॉडल जिला’ बनकर उभर सकता है।
प्रमुख हितधारकों की उपस्थिति
कार्यशाला में बिल्डिंग ब्लॉक विश्लेषण के माध्यम से जमीनी चुनौतियों और समाधानों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में पीएचई, ग्रामीण विकास, महिला एवं बाल विकास, जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों सहित सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक, पंप ऑपरेटर और विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी की।


