Tuesday, November 3, 2026
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MP News: भारी डिस्काउंट के जाल में फंस रहे ग्राहक… सावधानी से करें ऑनलाइन शॉपिंग

रिफंड के नाम पर साइबर ठगी तक बढ़ा खतरा

भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ ऑनलाइन शॉपिंग ने खरीदारी को आसान जरूर बना दिया है, लेकिन इसके साथ फर्जीवाड़े और साइबर ठगी का खतरा भी तेजी से बढ़ा है। मोबाइल, लैपटॉप, इलेक्ट्रॉनिक सामान, कपड़े और जूतों सहित कई उत्पादों के नाम पर ग्राहकों को नकली या ब्रांड से मिलते-जुलते सामान भेजे जाने के मामले सामने आ रहे हैं। मध्यप्रदेश में भी ऑनलाइन खरीदारी से जुड़े फर्जीवाड़े की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। कहीं नामी ई-कॉमर्स कंपनियों जैसी दिखने वाली फर्जी वेबसाइट बनाकर लोगों से भुगतान कराया जा रहा है तो कहीं थर्ड पार्टी विक्रेताओं के जरिए नकली उत्पाद ग्राहकों तक पहुंच रहे हैं।

50 से 80 फीसदी डिस्काउंट का लालच
ठग बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों की वेबसाइट, लोगो और डिजाइन की नकल कर फर्जी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तैयार करते हैं। इसके बाद 50 से 80 प्रतिशत तक की छूट, सीमित स्टॉक और कुछ घंटों में ऑफर समाप्त होने जैसे संदेशों के जरिए ग्राहकों पर तत्काल खरीदारी का दबाव बनाया जाता है। भुगतान होने के बाद कई मामलों में या तो सामान भेजा ही नहीं जाता या फिर ऑर्डर किए गए उत्पाद की जगह नकली सामान पहुंचा दिया जाता है। कुछ मामलों में शिकायत के बाद ग्राहक को राशि वापस कर दी जाती है, लेकिन नकली उत्पाद वापस लेने की कोई प्रक्रिया नहीं अपनाई जाती।

रिफंड के नाम पर ठगी का दूसरा जाल
नकली या गलत सामान मिलने के बाद ग्राहक जब इंटरनेट पर कस्टमर केयर नंबर तलाशते हैं तो वे एक और साइबर जाल में फंस सकते हैं। ठग फर्जी कस्टमर केयर नंबरों के माध्यम से रिफंड दिलाने का झांसा देते हैं। इस दौरान ग्राहकों से ओटीपी, बैंक खाते की जानकारी, स्क्रीन शेयर करने या किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने के लिए कहा जाता है। ऐसी जानकारी साझा करने पर बैंक खाते से रकम निकाले जाने का खतरा रहता है।

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ऐसे सामने आए फर्जीवाड़े के मामले
एक उपभोक्ता ने भारी डिस्काउंट देखकर ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से गोल्ड कॉफी ऑर्डर की थी। डिलीवरी मिलने के बाद उत्पाद की पैकिंग अलग नजर आई। शिकायत करने पर राशि तो वापस कर दी गई, लेकिन नकली उत्पाद वापस लेने कोई नहीं पहुंचा।
वहीं एक और लॉजिस्टिक कंपनी से जुड़े ब्रांच मैनेजर, असिस्टेंट मैनेजर और डिलीवरी बॉय पर स्मार्ट वॉच के 20 पार्सल बदलने का आरोप लगा। आरोप है कि 30 लाख रुपये से अधिक कीमत के पार्सल में असली घड़ियों की जगह नकली वॉच रख दी गईं। मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज की।

पांच साल में करीब 20 लाख शिकायतें
राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़ी शिकायतों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2021 से 2025 के बीच कुल 19.87 लाख शिकायतें दर्ज हुईं। वर्ष 2021 में शिकायतों की संख्या 2.24 लाख थी, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 5.11 लाख तक पहुंच गई। आंकड़े बताते हैं कि ऑनलाइन खरीदारी बढ़ने के साथ ग्राहकों से जुड़े विवाद और फर्जीवाड़े की शिकायतें भी तेजी से बढ़ी हैं।

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मध्यप्रदेश में हर साल 15 हजार से ज्यादा शिकायतें
राज्य साइबर क्राइम सेल और 1930 हेल्पलाइन से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, मध्यप्रदेश में ऑनलाइन शॉपिंग फ्रॉड से संबंधित हर साल 15 हजार से अधिक शिकायतें दर्ज हो रही हैं।वर्ष 2022 से 2025 के बीच नकली, डुप्लीकेट और काउंटरफीट सामान से जुड़ी 17,500 से ज्यादा शिकायतें सामने आईं। इनमें अकेले 2025 के शुरुआती छह महीनों में 7,221 मामले दर्ज होने की बात सामने आई है।

जागो ग्राहक जागो: ऑनलाइन खरीदारी में बरतें ये सावधानियां

विक्रेता की जांच जरूर करें: किसी भी बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से खरीदारी से पहले विक्रेता की रेटिंग, ग्राहकों के रिव्यू और रिटर्न या रिफंड पॉलिसी की जानकारी जरूर लें।

भारी डिस्काउंट से रहें सतर्क: बाजार कीमत से बेहद कम दाम पर मिलने वाले महंगे उत्पादों की वेबसाइट और विक्रेता की विश्वसनीयता जांचे बिना भुगतान न करें।

फर्जी कस्टमर केयर नंबर से बचें: रिफंड या शिकायत के लिए गूगल पर मिले किसी भी अनजान नंबर पर भरोसा न करें। संबंधित कंपनी के आधिकारिक ऐप या वेबसाइट पर उपलब्ध संपर्क माध्यम का ही उपयोग करें।

ओटीपी और स्क्रीन शेयर न करें: किसी भी व्यक्ति को ओटीपी, बैंकिंग पासवर्ड या अन्य गोपनीय जानकारी न दें। अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल की स्क्रीन शेयर करने से भी बचें।

महंगे सामान की जांच करें: इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद खरीदते समय पैकेजिंग, सीरियल नंबर और जरूरत पड़ने पर आईएमईआई नंबर का सत्यापन जरूर करें।

साइबर ठगी होने पर यहां करें शिकायत
ऑनलाइन खरीदारी के दौरान साइबर फ्रॉड का शिकार होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें और आधिकारिक पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि ऑनलाइन फ्रॉड होने की स्थिति में तुरंत कार्रवाई हो सके।

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