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Damoh News : महिला सशक्तिकरण अधिकारी के नहीं दस्तावेज… 11 सालों से है पदस्थ

अधिकारियों ने जानकारी से किया इनकार

दमोह/वैभव नायक/खबर डिजिटल/ जिले में शासकीय कार्यालयों में चल रही ढर्राशाही और मनमानी किसी से छिपी हुई नहीं है। हालत यह है कि यहां एक बार पदस्थ होने वाले कर्मचारी दशकों तक यही जमे रहते है, और स्थानांतरण होने पर भी साठगांठ कर उसे निरस्त करा लेते है, लेकिन यहां तो जिले के महिला एवं बाल विकास कार्यालय में महिला सशक्तिकरण अधिकारी/ सहायक संचालक के रूप में पदस्थ संजीव मिश्रा के नियुक्ति संबंधी दस्तावजों के संबंध में ही संबंधित कार्यालय को ही जानकारी या उपलब्धता नहीं है। हालात यह है कि नियुक्ति दस्तावेज उपलब्ध कराए जाने के नाम पर विभाग के एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय में पत्राचार किए जा रहे है, लेकिन नियुक्ति संबंधी दस्तावेज फिर भी उपलब्ध नहीं कराए जा सके।

जानकारी छिपाने के लिए अलग-अलग हथकंडे
दरअसल सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत जिले में पदस्थ संजीव मिश्रा की नियुक्ति के दौरान प्रस्तुत किए गए समस्त दस्तावेजों के साथ इनके पदस्थ जिलों और कार्यकाल की जानकारी मांगी गई थी। जानकारी मांगे जाने पर कार्यालय महिला बाल विकास दमोह के द्वारा आवेदन को संयुक्त संचालक महिला एवं बाल विकास सागर संभाग को अंतरित करते हुए संबंधित जानकारी वहां से उपलब्ध होने की जानकारी दी गई। हैरानी की बात यह है कि उक्त पत्राचार के बाद लोक सूचना अधिकारी संयुक्त संचालक सागर द्वारा जानकारी उपलब्ध कराए जाने के स्थान पर सबसे पहले आवेदन स्पष्ट न होने की बात कह जानकारी देने से पल्ला झाड़ लिया। पत्र के आधार पर स्पष्टीकरण के बाद संभागीय कार्यालय ने कार्यकाल के संबंध में तो जानकारी उपलब्ध कराई लेकिन नियुक्ति संबंधी दस्तावेजों को निजी जानकारी बताते हुए दिए जाने से इंकार कर दिया।

पहले कहा – निजी जानकारी, फिर कहा उपलब्ध नहीं
जहां पहले संजीव मिश्रा की नियुक्ति संबंधी जानकारी मांगे जाने पर विभाग द्वारा गलत नियमों का हवाला देकर निजी जानकारी होने के नाम पर देने से इंकार कर दिया। हालांकि जब नियमों का हवाला दिया गया तो विभाग ने जानकारी उपलब्ध कराए जाने के स्थान पर संभागीय कार्यालय में दस्तावेज ना होने की बात कह आवेदन को पुनः जिला कार्यालय में स्थानांतरित कर दिया। इसके बाद जिला स्तर पर दस्तावेजों के लिए भोपाल स्तर से मंगाए जाने के लिए पत्राचार किए जाने की बात तो कही गई, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी नियुक्ति के दौरान उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों से जुड़ी कोई भी जानकारी उपलब्ध नहीं हो सकी है।

अधिकारी को दस्तावेज का ज्ञात नहीं!
इस पूरे मामले में महिला सशक्तिकरण अधिकारी संजीव मिश्रा का जवाब और भी हैरान कर देने बाला है। लोक सूचना अधिकारी द्वारा संबंधित अधिकारी से दस्तावेज से जुड़ी जानकारियां मांगे जाने पर अधिकारी ने इसे व्यक्तिगत दस्तावेज कह नियुक्ति के दौरान संचालनालय महिला एवं बाल विकास भोपाल को दिए जाने की बात कही गई। साथ ही उन्होंने यह भी लेख कर दिया कि उनके द्वारा क्या दस्तावेज दिए गए थे यह उन्हें ज्ञात नहीं है। इसी पत्र में उनके द्वारा इसे अपनी मनमर्जी से उक्त दस्तावेज दुबारा उपलब्ध कराए जाने की कोई आवश्यकता न होने की बात भी पत्र के कही गई।

जिले में पदस्थ हुए तो फिर कही गए ही नहीं
जिले में महिला सशक्तिकरण अधिकारी/सहायक संचालक के रूप में पदस्थ किए गए संजीव मिश्रा के संबंध में महत्वपूर्ण बात यह भी है कि यह नियुक्ति के बाद पहले स्थानांतरण पर दमोह जिले में पदस्थ हुए तो एक दशक बीत जाने के बाद भी यह लगातार दमोह में ही बने हुए है। विभागीय जानकारी अनुसार 1 फरवरी 2014 को उपस्थिति के बाद यह 21 अगस्त 2014 यह तत्कालीन होशंगाबाद में पदस्थ हुए। महज 6 माह बाद इनका दमोह स्थानांतरण किए जाने पर 28 अगस्त 2014 से आज दिनांक तक 11 वर्ष 4 माह से अधिक समय से लगातार यह दमोह में ही है। इस दौरान इनके स्थानांतरण किए जाने के आदेश तो जारी हुए लेकिन विभागीय साठगांठ के चलते उन्हें निरस्त किया जाता रहा।

कई शिकायतों पर जांच लंबित
दमोह में इस लंबे कार्यकाल के दौरान संजीव मिश्रा प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकार भी रहे है और इनसे जुड़ी कई शिकायतें और आरोप भी सामने आए है। इनके विरुद्ध राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में महिलाओं द्वारा शिकायतें की गई है, जिसकी जांच लंबित है। इसके अलावा इनके दमोह में पदस्थ रहते हुए दमोह का चर्चित मिशनरी संस्था के अवैध बाल गृह का मामला सामने आया था। मामले में तत्कालीन राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो द्वारा विभागीय अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े किए थे। इसके अलावा प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी रहते हुए मनमाने प्रभार देने और आउटसोर्स कर्मचारियों में अपने चहेते लोगों को रखे जाने के आरोप भी इन पर लगते रहे है।

इनका कहना है
दस्तावेज संबंधी रिकॉर्ड विभाग स्तर पर होते है। यदि ऐसी कोई शिकायत मेरे पास आती है तो शासन को भेजी जाएगी।

सुधीर कोचर
कलेक्टर

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