राणापुर, नावेद रजा/ खबर डिजिटल/तालाब किनारे स्थित शनि मंदिर में शनिवार को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की शनि चरी अमावस्या पद्म योग के साथ धूमधाम से मनाई गई। भक्तों ने भगवान शनि देव का दूध से अभिषेक किया और दोपहर 12 बजे आरती के बाद प्रसाद वितरित किया।
पंडित दिनेश बैरागी ने बताया कि इस दिन पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है, क्योंकि पीपल में सभी देवताओं का वास होता है और इस पर शनि देव का विशेष प्रभाव रहता है। यह दिन पितृपक्ष की तैयारी का आरंभिक दिन भी है।
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कुशोत्पाटिनी अमावस्या पर कुशा (काश) तोड़ने की परंपरा निभाई गई, जिसका उपयोग आगामी 16 दिनों तक श्राद्ध व पितृकर्म में किया जाएगा। पंडित बैरागी ने बताया कि शनि अमावस्या पर स्नान, दान और शनि पूजा का विशेष महत्व है। शनि की साढ़ेसाती, पितृ दोष, कालसर्प या ग्रहदोष से पीड़ित लोग इस दिन शनि देव की पूजा कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं। शाम को शनि राज भवन में संगीतमय शनि चालीसा पाठ का आयोजन भी होगा।
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