बैतूल/सचिन जैन/खबर डिजिटल/ बैतूल भाजपा के नए जिला अध्यक्ष सुधाकर पवार को कमान संभाले एक साल पूरा हो चुका है, लेकिन जिला संगठन में अब वह रौनक नजर नहीं आती, जो कभी पूर्व जिला अध्यक्ष बबला शुक्ला के दौर में दिखती थी। तब हाल यह रहता था कि कार्यक्रम की सूचना मिलते ही कार्यकर्ता बिना बुलाए, समय से पहले पहुंच जाते थे। जोश ऐसा कि अतिथि आए नहीं और जिंदाबाद के नारे पहले ही गूंजने लगते थे। युवा कार्यकर्ताओं की टोली अलग ही रंग में नजर आती थी। वहीं अब हालात कुछ और ही कहानी कहते हैं।
बीजेपी से कार्यकर्ताओं ने बनाई दूरी
रविवार को माचना करबला ब्रिज के भूमिपूजन कार्यक्रम पर नजर डालें तो सगठन की असल तस्वीर सामने आ जाती है। कार्यक्रम जरूर हुआ, मंच सजा, नेता पहुंचे, लेकिन वह स्वाभाविक भीड़ और उत्साह गायब रहा। चर्चा यह रही कि अगर गंज मंडल और कोठांबाजार मंडल अध्यक्षा ने मोर्चा न संभाला होता, तो शायद तस्वीर और भी फीकी होती। विकास और विक्रम पिछले तीन-चार दिनों से लगातार तैयारियों में जुटे रहे। उनकी मेहनत रंग लाई और कम से कम कुर्सियां खाली नहीं रहीं, यही बड़ी राहत मानी गई।
कार्यक्रम स्थल पर चले खूब चटखारे
वीओ – माचना करबला ब्रिज के भूमिपूजन कार्यक्रम में लोगों के बीच चटकारे भी खूब लगे। दबी आवाज में भाजपा और युवा संगठनों से जुड़े कुछ नेताओं ने कहा-चलो, जैसा भी रहा, कार्यक्रम फेल तो नहीं हुआ। यह वाक्य अपने आप में बहुत कुछ कह गया। सवाल उठने लगे कि क्या अब कार्यक्रम की सफलता सिर्फ फेल न होने तक सीमित रह गई है? संगठन के भीतर यह भी चर्चा है कि नए जिला अध्यक्ष अपने एक साल की उपलब्धि दो ग्राम पंचायतों में समर्थित उम्मीदवारों की जीत को मानते हैं। जीत अहम है, इसमें कोई शक नहीं, लेकिन पुराने कार्यकर्ता पूछ रहे हैं – क्या संगठन की मजबूती सिर्फ चुनावी नतीजों से मापी जाएगी, या फिर वही पुराना जोश, अनुशासन और कार्यकर्ताओं की स्वत: उपस्थिति भी कभी लौटेगी? फिलहाल, एक साल बाद भाजपा जिला संगठन में सवाल ज्यादा हैं और जवाब कम है।


