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विक्रम से सम्राट विक्रमादित्य हुआ विश्वविद्यालय, सीएम डॉ. मोहन यादव ने यहीं से की थी सियासत में एंट्री

सीएम डॉ. मोहन यादव ने किया संकल्प पूरा

उज्जैन/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन का विक्रम विश्वविद्यालय अब सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उज्जैन दौरे के दौरान विश्वविद्यालय पहुंचकर नाम पट्टिका का अनावरण किया। कुलगुरु अर्पण भारद्वाज ने इसे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों का ही परिणाम बताया, जो एक बार फिर से इतिहास में दर्ज हो गया।

सीएम डॉ. मोहन यादव ने की थी घोषणा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को 30 मार्च 2025 को विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के 29 वें दीक्षांत समारोह में मानद डी लिट् उपाधि से सम्मानित किया गया था, उसी वक्त मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी कि विक्रम विश्वविद्यालय अब सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय उज्जैन के नाम से पहचाना जाएगा। इसके तत्काल बाद विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने आपातकालीन बैठक बुलाकर विक्रम विश्वविद्यालय का नाम सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय करने का प्रस्ताव पारित कराकर राज्य शासन को भेज दिया। जिसका परिणाम अब दिखाई दिया।

कैबिनेट में सीएम डॉ. मोहन यादव ने रखा प्रस्ताव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव रखा था। जोकि 4 अगस्त 2025 को विधानसभा में विधेयक पारित हो गया और अब 8 सितंबर राजपत्र में प्रकाशन के बाद सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय उज्जैन का नामकरण हो गया है। 10 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने विश्वविद्यालय पहुंचकर नाम पट्टिका का अनावरण किया। बता दें सीएम डॉ. मोहन यादव ने भी इसी विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है, और छात्र राजनीति से अपने सियासी जीवन की शुरुआत की थी।

1956 में हुई थी विश्वविद्यालय की स्थापना
कार्तिक कृष्ण चतुर्थी सन् 1956 को आधारशिला दिवस पर विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन की घोषणा की गई थी। विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन को सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय बनाने की बात इतिहास में भी दर्ज है। जिसका प्रस्ताव सालों पहले नामी हस्तियों ने स्वतंत्रता से बाद दिया था। उनका प्रस्ताव था कि विश्वविद्यालय का नाम प्रसिद्ध शासक “विक्रमादित्य” के नाम पर रखा जाए.”प्राचीनकाल से शिक्षा के केंद्र रहे उज्जैन ने कई नामी हस्तियों को दिया। भगवान श्रीकृष्ण ने भी सांदीपनी आश्रम उज्जैन से ही शिक्षा प्राप्त की थी।

मध्यभारत के समय से विश्वविद्यालय की पहचान
देश की आजादी के बाद जब मध्यभारत राज्य अस्तित्व में आया, तो प्रस्तावित विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के लिए उज्जैन चुना गया। जिसकी स्थापना 1 मार्च 1957 को हुई थी। तब विक्रम विश्वविद्यालय की आधारशिला भारत के तत्कालीन गृह मंत्री गोविंद बल्लभ पंत ने 23 अक्टूबर 1956 को रखी गई थी। समारोह की अध्यक्षता मध्यभारत राज्य के राजप्रमुख स्वर्गीय जीवाजीराव सिंधिया ने की थी।

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