भोपाल/ खबर डिजिटल/ भोपाल/ख़बर डिजिटल। मुख्यमंत्री निवास पर आज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का लोकार्पण किया। इस अवसर पर CM मोहन यादव ने कहा कि समय की गणना अंग्रेज़ी पद्धति के अनुसार रात 12 बजे से नहीं, बल्कि हमारी परंपरा के अनुसार सूर्योदय से सूर्योदय तक होनी चाहिए।
सीएम ने कहा कि हमारे त्योहार और वर्ष गणना तिथि एवं छह ऋतुओं के आधार पर निर्धारित होते हैं। इसलिए यह घड़ी केवल तकनीकी साधन नहीं, बल्कि हमारी सनातन संस्कृति और वैज्ञानिक दृष्टि की धरोहर है।
सीएम डॉ. मोहन यादव के उद्बोधन की प्रमुख बातें :
प्राचीन पद्धति में 60 सेकंड का मिनट नहीं, बल्कि 30 घंटे में 30 मुहूर्त माने जाते थे।
खगोल विज्ञान का ज्ञान सूर्य की छाया से समझा जाता था।
भारत का सेंटर पॉइंट उज्जैन रहा है, जो समय के साथ डोंगला तक विस्तारित हुआ।
भगवान श्रीकृष्ण भी समय गणना का केंद्र खोजने डोंगला के पास नारायणा आए थे।
10 हजार साल पुराने सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण की गणना वैदिक पद्धति से सटीक संभव है, जबकि आज का कंप्यूटर भी इसमें सक्षम नहीं।
सावन में छाता लेकर चलने की परंपरा भी इसी गणना का वैज्ञानिक परिणाम है।
ग्रह-नक्षत्र और तिथियों पर आधारित निर्णय परंपरा का हिस्सा रहे हैं। विधानसभा में भी यही परंपरा लागू करने का प्रयास किया गया है।
पश्चिम का समय अब समाप्त हो रहा है, अब पूर्व का समय और भारत का ज्ञान मानवता को दिशा देगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में सरकार बनने के छह माह के भीतर ही योग को विश्व स्तर पर स्थापित किया। उसी तरह यह वैदिक घड़ी भारत की पहचान और धरोहर को विश्व के सामने लाने का काम करेगी।


