Bihar Election Result: पटना/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ दावों की किस तरह से हवा निकलती है, कैसे नेताओं को जीत दिलाने के लिए रणनीति बनाने का दावा करने वाला नेता फिसड्डी साबित होता है, सारे अन्य पुराने दलों को छोड़कर मीडिया भी उस व्यक्ति का इंटरव्यू लेने के लिए दिन-रात नहीं देखते, लेकिन उसकी असफलता ने सारे वो गणित बिगाड़ दिए जो कहते थे कि कुछ सीटें तो बिहार विधानसभा चुनाव में जनसुराज पार्टी को आ ही जाएगी, लेकिन नतीजा सब बातों से अलग निकला, और जनसुराज पार्टी के अधिकतर प्रत्याशी अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए।
कहां गया प्रशांत किशोर का वो जादू
बिना राजनीतिक अनुभव के बिहार जैसे राज्य में सियासत नहीं की जा सकती, ये साबित हो गया है, जनसुराज पार्टी की असफलता से, जबकि दावे प्रतिशत के हिसाब से वोटों के किए जा रहे थे, कि इतने प्रतिशत वोट दोनों गठबंधन को नहीं करते, नोटा पर भी वोट पड़ते हैं, सारे आंकड़ों को बिहार की जनता ने सिरे से खारिज कर दिया और प्रशांत किशोर को एक बार फिर सोचने पर मजबूत कर दिया कि रणनीति के साथ-साथ और भी कुछ कहना चाहिए, ये बातें बिहार में उनकी असफलता पर आ हर एक व्यक्ति की जुबान से सुनाई दे रहा है।
’10 से कम सीटें, जीतेंगे या 150 से ज्यादा’
प्रशांत किशोर का तमाम मीडिया इंटरव्यू में दावा था कि 10 से कम या 150 से ज्यादा सीटें जीतेंगे, लेकिन नतीजों ने तो शून्य पर लाकर खड़ा कर दिया, जबकि उन्होंने चुनावी रणनीतिकार के रुप में कई नेताओं को चुनावी जीत दिलाई, लेकिन जब चुनावी इम्तिहान की बारी आई तो करारी हार का सामना करना पड़ा। बिहार में तीसरे मोर्चे और एक राजनीतिक विकल्प के रूप में प्रचारित उनकी जन सुराज पार्टी खाता भी नहीं खोल पाई, जोकि चौंकाने वाली बात इसीलिये है कि उनकी राजनीति का तरीका एक दम नया था, पर जनता को पसंद क्यों नहीं आया।
प्रशांत किशोर एक रणनीतिकार
किशोर ने एक चुनावी रणनीतिकार के रूप में खूब सुर्खियां बटोरीं थी, जब उन्होंने 2012 के गुजरात चुनाव में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा के विजयी अभियान की रूपरेखा तैयार की। उस समय, चुनावों के लिए राजनीतिक परामर्श बहुत आम बात नहीं थी, यह एक नया प्रयोग था, और भाजपा की ज़बरदस्त जीत के साथ प्रशांत किशोर सुर्खियों में छा गए। टीम नरेंद्र मोदी ने 2014 के लोकसभा चुनावों में भी किशोर की विशेषज्ञता का इस्तेमाल किया, और वो केंद्र की सत्ता में काबिज हो गए। हालाँकि, अगले साल, किशोर दूसरी तरफ़ थे, बिहार में महागठबंधन अभियान को धार दे रहे थे, और उन्होंने फिर से सफलता हासिल की, जब नीतीश कुमार-लालू यादव की जोड़ी ने शानदार जीत हासिल की। इसी तरह 2017 के पंजाब चुनाव में, किशोर ने तत्कालीन कांग्रेस नेता अमरिंदर सिंह को जीत दिलाई। इसके बाद उन्होंने वाईएसआरसीपी के जगन मोहन रेड्डी की मदद की और उन्हें आंध्र प्रदेश में जीत दिलाई। 2021 में, किशोर ने तमिलनाडु में एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस की सहायता की और दोनों दलों ने बड़ी सफलता हासिल की। वहीं अबकी बार प्रशांत किशोर की क्षमता पर प्रश्नचिन्ह लग गया, जब वो बिहार में चारों खाने चित्त हो गए।


