Tuesday, November 3, 2026
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पाकिस्तान में तेल-गैस की चोरी की तो 14 साल की होगी सजा, लगाई जाएगी टेरर की धारा

पाकिस्तान इस समय गंभीर ऊर्जा संकट से गुजर रहा है. ईरान से जुड़े युद्ध जैसे हालात और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर सीधे तेल और गैस की सप्लाई पर पड़ा है, जिससे देश में हालात बिगड़ते जा रहे हैं. देश अपनी जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है. जैसे ही सप्लाई प्रभावित हुई, कई इलाकों में ईंधन की कमी देखने को मिलने लगी. इससे आम लोगों से लेकर उद्योगों तक सभी पर असर पड़ा है. नेशनल असेंबली में एक विधेयक पेश किया गया. इस विधेयक के पास होते ही पाकिस्तान में तेल और गैस जमा करना, तस्करी करना और उसे अवैध रूप से रखना गुनाह हो जाएगा.

डॉन अखबार की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान सरकार ने संसद में आपराधिक कानून संशोधन विधेयक 2026 पेश किया है. यह कदम देश में चल रहे तेल और गैस संकट को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है. सरकार का कहना है कि कुछ गिरोह माफियाओं के साथ मिलकर पहले तेल डिपो और ठिकानों को निशाना बनाते हैं, फिर वहां से ईंधन जमा करके उसे ज्यादा कीमत पर बेचते हैं. हालात को नियंत्रित करने के लिए सरकार अब सख्त कानून लाने की तैयारी में है. प्रस्तावित नियमों के तहत तेल या गैस की चोरी को गंभीर अपराध माना जाएगा.

तेल और गैस के नए कानून में क्या है?

  • अगर कोई व्यक्ति पाइपलाइन से छेड़छाड़ करता है या अवैध तरीके से तेल-गैस निकालता है, तो उसे कड़ी सजा दी जाएगी. इस अपराध के लिए अधिकतम 14 साल तक की जेल का प्रावधान रखा गया है.
  • इसके साथ ही दोषियों पर भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा. सरकार का मानना है कि इस तरह के कदम उठाए बिना इस समस्या पर काबू पाना मुश्किल है.
  • अगर कोई व्यक्ति तेल या गैस की अवैध तस्करी या जमाखोरी करते हुए पकड़ा जाता है, तो उसे अधिकतम 10 साल तक की जेल हो सकती है. वहीं पेट्रोलियम पाइपलाइन को नुकसान पहुंचाने या उस पर हमला करने वालों के खिलाफ भी कड़ी सजा का प्रावधान रखा गया है.
  • नए प्रस्तावित कानून के तहत तेल और गैस से जुड़े मामलों में आरोपित व्यक्ति को पकड़ने के लिए वारंट जरूरी नहीं होगा. अधिकारियों को बिना किसी पूर्व अनुमति के सीधे कार्रवाई करने का अधिकार दिया जाएगा.
  • पाकिस्तान में आतंकवाद से जुड़े मामलों में भी इसी तरह के नियम लागू हैं. ऐसे मामलों में गिरफ्तारी के लिए वारंट की आवश्यकता नहीं होती. साथ ही, दोषी पाए जाने पर आतंकियों को कम से कम 14 साल की सजा दी जाती है.

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