सम्राट चौधरी ने बुधवार (15 अप्रैल, 2026) को पद की शपथ ली और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से बिहार के पहले मुख्यमंत्री बने। बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने पटना के लोक भवन में श्री चौधरी को पद की शपथ दिलाई.जेडीयू के नेता विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव ने भी मंत्री पद की शपथ ली. दोनों जेडीयू नेता उपमुख्यमंत्री का पदभार ग्रहण करेंगे. कई दिनों से चल रही अटकलों और अनिश्चितताओं के बाद, मंगलवार (14 अप्रैल, 2026) को श्री सम्राट चौधरी को भाजपा और एनडीए विधानसभा दलों का नेता चुना गया. यह चुनाव बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार के आधिकारिक इस्तीफे के एक घंटे बाद हुआ. जेडीयू के नेता श्री कुमार पिछले सप्ताह राज्यसभा सांसद बने थे.
कितने पढ़े लिखे हैं सम्राट चौधरी
बिहार के मुख्यमंत्री Samrat Choudhary की शैक्षणिक योग्यता लंबे समय से चर्चा का विषय बनी हुई है. मुख्यमंत्री बनने के बाद लोगों की दिलचस्पी इसमें और बढ़ गई है. आम लोग ही नहीं, बल्कि राजनीतिक विरोधी भी समय-समय पर उनकी पढ़ाई को लेकर सवाल उठाते रहे हैं. सम्राट चौधरी ने अपनी शुरुआती पढ़ाई बिहार में पूरी की. इसके बाद उन्होंने Madurai Kamaraj University से शिक्षा हासिल की. चुनावी हलफनामे में उन्होंने प्री-फाउंडेशन कोर्स यानी PFC का जिक्र किया है. हालांकि इसे पारंपरिक ग्रेजुएशन डिग्री के रूप में नहीं देखा जाता, इसी वजह से उनकी शैक्षणिक योग्यता को लेकर बहस होती रहती है. फिर भी वे इसे अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश करते हैं.
पढ़ाई से ज्यादा काम से जाने जाते हैं सम्राट चौधरी
उनके नाम के साथ मानद डी.लिट. यानी Doctor of Letters की उपाधि भी जुड़ी बताई जाती है. यह एक सम्मान स्वरूप दी जाने वाली डिग्री होती है, जो किसी विश्वविद्यालय द्वारा विशेष योगदान के लिए दी जाती है. चूंकि यह नियमित शैक्षणिक डिग्री नहीं होती, इसलिए इसे लेकर भी कई बार भ्रम की स्थिति बनती है. विपक्ष इसे मुद्दा बनाता है, जबकि समर्थक इसे सम्मान के रूप में देखते हैं.
सम्राट चौधरी खुद मानते हैं कि उनकी पहचान उनकी पढ़ाई से ज्यादा उनके काम से है. उन्होंने राजनीति और प्रशासन में लंबे समय तक काम किया है और कई अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं. मंत्री और उपमुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने कई विभाग संभाले हैं. उनका कहना है कि अनुभव ही सबसे बड़ी योग्यता होती है और उन्होंने अपने काम के दम पर अपनी पहचान बनाई है.
तारापुर विधानसभा क्षेत्र से गहराई से जुड़े हैं
उनका राजनीतिक आधार बिहार के मुंगेर जिले में है और वे तारापुर विधानसभा क्षेत्र से गहराई से जुड़े हुए हैं. यह इलाका लंबे समय से उनके परिवार का राजनीतिक गढ़ माना जाता है. यह सीट जमुई लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है और यहां उनकी मजबूत पकड़ देखी जाती है. जमीनी स्तर पर उनका अच्छा जनाधार माना जाता है. उन्होंने 1990 के दशक में सक्रिय राजनीति में कदम रखा था. धीरे-धीरे उन्होंने अपनी पहचान बनाई और विधायक बनने के बाद मंत्री पद तक पहुंचे. उन्होंने कृषि, शहरी विकास और पंचायती राज जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली. उनकी छवि एक सख्त और प्रभावी नेता के रूप में बनी है. बाद में वे प्रदेश भाजपा अध्यक्ष भी बने.साल 2024 में उन्हें बिहार का उपमुख्यमंत्री बनाया गया, जिसके बाद उनका राजनीतिक कद और बढ़ गया. वे राज्य की राजनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए. नीतिगत फैसलों में उनकी अहम भूमिका देखी जाती है और वे संगठन व सरकार के बीच संतुलन बनाए रखने में भी सक्रिय रहते हैं. आने वाले समय में भी उनकी भूमिका को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
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