Tuesday, November 3, 2026
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MP में बड़ा प्रशासनिक बदलाव, खत्म हो सकता है PHE विभाग, मोहन सरकार की तैयारी

मध्यप्रदेश में पेयजल व्यवस्था से जुड़े सबसे पुराने विभाग लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी यानी पीएचई विभाग में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. मुख्यमंत्री Mohan Yadav की अध्यक्षता में हुई नीतिगत बैठक में विभाग को दो हिस्सों में बांटकर अन्य विभागों में शामिल करने पर सहमति बनी है. सरकार की योजना के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले पीएचई अमले को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधीन किया जाएगा, जबकि शहरी क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों और व्यवस्थाओं को नगरीय विकास एवं आवास विभाग को सौंपा जाएगा. हालांकि विभाग को पूरी तरह समाप्त किया जाएगा या नहीं, इस पर अंतिम फैसला अभी बाकी है.

सरकार ने उठाया ये बड़ा कदम

सरकार का यह कदम केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय की उस नीति से जुड़ा माना जा रहा है, जिसमें राज्यों को एकल नल-जल योजनाओं की जिम्मेदारी पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को देने की सलाह दी गई है. मध्यप्रदेश में इस दिशा में पहले से तैयारी चल रही थी और अब पीएचई विभाग के पुनर्गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है. सरकार का मानना है कि इससे पेयजल योजनाओं के संचालन और निगरानी में बेहतर तालमेल बनाया जा सकेगा. बैठक में ओंकारेश्वर और ममलेश्वर को मिलाकर नया विकास प्राधिकरण बनाने पर भी चर्चा हुई. इसके तहत ओंकारेश्वर-ममलेश्वर विकास प्राधिकरण गठित करने की योजना पर विचार किया गया, जिससे क्षेत्र के धार्मिक और पर्यटन विकास को गति दी जा सके.

प्रदेश के सभी स्कूल स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित होंगे

इसके अलावा शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी कई महत्वपूर्ण फैसलों पर सहमति बनी. तय किया गया कि प्रदेश के सभी स्कूल स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित होंगे. जिन सांदीपनि स्कूलों में बड़े भवन होने के बावजूद केवल एक शिफ्ट में कक्षाएं लग रही हैं, वहां अन्य गतिविधियों को भी संचालित करने की योजना बनाई जाएगी. कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को आपस में मिलाने और कुछ स्कूलों को बंद करने पर भी विचार किया गया है.

पट्टों के वितरण की तैयारी पर भी चर्चा

सरकार ने स्वामित्व योजना के विस्तार और 50 लाख पट्टों के वितरण की तैयारी पर भी चर्चा की. इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है. पंचायतों में आबादी भूमि घोषित करने की प्रक्रिया को सरल बनाने और पेयजल आपूर्ति व्यवस्था की नियमित समीक्षा करने पर भी जोर दिया गया. अधिकारियों को लापरवाही मिलने पर सख्त कार्रवाई की छूट देने की बात भी सामने आई है.

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