भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ अनुकंपा नियुक्तियों के इंतजार में बैठे लोगों के लिए बड़ा फैसला आया है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने निर्णय दिया है कि कर्मचारी वर्कचार्ज में शामिल होने से पहले करेंगे तीन साल का प्रशिक्षण करेंगे। उन्हें दैनिक वेतनभोगी के समान समेकित वेतन पर काम करना होगा। उसके बाद ही उन्हें वर्कचार्ज स्थापना में शामिल किया जाएगा।
सीधे स्थायी सेवा का नहीं मिलेगा लाभ
हाईकोर्ट के निर्णय के बाद केवल अनुकंपा आधार पर नियुक्त होने से कर्मचारियों को सीधे स्थायी सेवा का लाभ नहीं मिलेगा। वो तय अवधि तक दैनिक वेतनभोगी के रुप में अनुभव लेने के लिए काम करेंगे, ताकि काम की जिम्मेदारियों और नियमों को लेकर तैयार हो जाए। इसके पीछे मंशा इतने समय तक अनुकंपा नियुक्ति वाले व्यक्ति को काम सीखने की चुनौती को कारण माना जा रहा है।
जल संसाधन विभाग से संबंधित था मामला
मामला जल संसाधन विभाग का था, जिसमें दैनिक वेतन भोगियों के आश्रितों ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। जिसके बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए यह व्यवस्था 10 मई 1984 के नोटिफिकेशन में निर्धारित की है। जिस पर विभाग ने सीधे भर्ती देने के बजाय तीन वर्षों तक उन्हें दैनिक वेतन भोगियों के रूप में कार्य करने का निर्देश दिया, जिसे चुनौती देते हुए याचिकाएं दाखिल की गईं थी।
अन्य मामलों में भी हाईकोर्ट ने किया निर्णय
जबलपुर हाईकोर्ट ने भर्ती से संबंधित एक मामले में आदेश दिया कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए सर्जन का एक पद रिक्त रखें। जस्टिस मनिंदर सिंह भट्टी की सिंगल बेंच ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के चेयरमैन, आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग, रजिस्ट्रार मध्यप्रदेश मेडिकल काउंसिल और अन्य से जवाब तलब किया है। याचिकाकर्ता डॉ. गगन सोनी ने अदालत में दलील दी कि 2024 में सरकार ने सर्जन के पद पर भर्ती निकाली थी, जिसमें कुल 64 पद OBC के लिए आरक्षित थे। लेकिन 21 अगस्त 2025 को चयन सूची से उनका नाम हटा दिया गया।


