खबर डिजिटल/भोपाल/ भागलपुर/ बिहार के भागलपुर जिले के मिर्जापुर गांव (बौर थाना क्षेत्र) में इन दिनों सन्नाटा और गम का माहौल है। भारतीय सेना के आमी मेडिकल कोर (AMC) में तैनात हवलदार नीरज कुमार अब हमारे बीच नहीं रहे। भोपाल में कर्तव्य पालन के दौरान हुए एक सड़क हादसे ने इस जांबाज सिपाही को हमसे छीन लिया। 20 मार्च को अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।
कैसे हुआ हृदयविदारक हादसा?
घटना 16 मार्च की है, जब हवलदार नीरज कुमार भोपाल में अपनी ड्यूटी पर तैनात थे। आधिकारिक कार्य के सिलसिले में एक मेडिकल यूनिट से दूसरी यूनिट जाने के दौरान उनकी बाइक अनियंत्रित हो गई। इस दुर्घटना में उनके सिर पर गंभीर चोटें आईं, जिसके बाद उन्हें तुरंत सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों ने उनका ऑपरेशन भी किया, लेकिन चार दिनों तक मौत से जूझने के बाद वे यह जंग हार गए।
पत्नी से हुई आखिरी बात: मैं ठीक हूं
नीरज कुमार की अपनी पत्नी निशा भारती से हुई आखिरी बातचीत अब परिवार के लिए एक कभी न भूलने वाली टीस बन गई है। हादसे के बाद उन्होंने फोन पर पत्नी को सांत्वना देते हुए कहा था, मैं अब ठीक हूं तुम्हें अभी भोपाल आने की जरूरत नहीं है। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। उसी रात दोबारा आए फोन ने परिवार की खुशियां उजाड़ दीं। जब तक पत्नी कैंप पहुंचीं, नीरज शहादत का जाम पी चुके थे।
सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई
रविवार को जब जवान का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव मिर्जापुर पहुंचा, तो जनसैलाब उमड़ पड़ा। वीर शहीद अमर रहे के नारों से पूरा आसमान गूंज उठा। कर्नल योगेंद्र और सैन्य अधिकारियों की मौजूदगी में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। बरारी गंगा घाट पर उनके 10 वर्षीय पुत्र नयन ने जब कांपते हाथों से मुखाग्नि दी, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें छलक गईं।
परिवार की सरकार से गुहार
2009 में सेना में भर्ती हुए नीरज अपने पीछे पत्नी, एक बेटा, एक बेटी और वृद्ध मां को छोड़ गए हैं। परिवार ने सरकार से मांग की है कि जवान की पत्नी को योग्यतानुसार सरकारी नौकरी और बच्चों की शिक्षा के लिए समुचित सहायता प्रदान की जाए, ताकि इस वीर के परिवार का भविष्य सुरक्षित रह सके।


