डिंडौरी/शैलेश नामदेव/खबर डिजिटल/ जिला चिकित्सालय डिंडोरी की सुरक्षा व्यवस्था उस समय पूरी तरह बेनकाब हो गई, जब रात के समय एक आवारा कुत्ता अस्पताल की प्रथम मंजिल पर स्थित प्रसव (मेटरनिटी) वार्ड तक पहुंच गया। यह घटना न केवल अस्पताल प्रशासन की घोर लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
रात की शांति में सुरक्षा व्यवस्था हुई ध्वस्त
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना रात के समय की है, जब जिला अस्पताल में सीमित स्टाफ के बीच उपचार कार्य चल रहा था। इसी दौरान एक आवारा कुत्ता बिना किसी रोक-टोक के अस्पताल परिसर में दाखिल हुआ और सीढ़ियां चढ़ते हुए सीधे प्रथम मंजिल स्थित प्रसव वार्ड तक पहुँच गया। उस वक्त वार्ड में गर्भवती महिलाएं भर्ती थीं।
प्रसव वार्ड में मचा हड़कंप
अचानक वार्ड में कुत्ते को देखकर महिलाओं, नर्सिंग स्टाफ और परिजनों में घबड़ाहट फैल गयी।परिजनों का कहना है कि यदि कुत्ता आक्रामक हो जाता या किसी महिला अथवा नवजात को नुकसान पहुंचाता, तो परिणाम बेहद भयावह हो सकते थे।
रात्रिकालीन सुरक्षा पूरी तरह नदारद
घटना के समय न तो कोई सुरक्षा गार्ड मौके पर मौजूद था और न ही प्रवेश द्वारों पर निगरानी दिखाई दी। कुत्ता कुछ समय तक वार्ड क्षेत्र में घूमता रहा, जिसके बाद लोगों की मदद से उसे बाहर निकाला गया। इस घटना ने अस्पताल की रात्रिकालीन सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।
पहले भी उठती रही हैं शिकायतें
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिला अस्पताल में आवारा कुत्तों और पशुओं की आवाजाही कोई नई बात नहीं है। पूर्व में भी ऐसी घटनाएँ सामने आ चुकी हैं, लेकिन हर बार अस्पताल प्रशासन ने अस्थायी कदम उठाकर मामले को नजरअंदाज कर दिया।
मातृ और नवजात सुरक्षा से सीधा खिलवाड़
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, प्रसव वार्ड जैसे अतिसंवेदनशील क्षेत्र में स्वच्छता और सुरक्षा के कड़े मानक अनिवार्य होते हैं। वहां किसी भी आवारा पशु का पहुँचना संक्रमण, डर और दुर्घटना का बड़ा कारण बन सकता है। यह घटना सीधे-सीधे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ मानी जा रही है।
प्रशासनिक दावों की खुली पोल
अस्पताल प्रशासन द्वारा सुरक्षा और निगरानी के जो दावे किए जाते हैं, यह घटना उन्हें पूरी तरह खोखला साबित करती है। सवाल यह है कि जब रात में प्रसव वार्ड तक कुत्ता पहुँच सकता है, तो मरीजों की सुरक्षा किस भरोसे छोड़ी गई है?
सख्त कार्रवाई की मांग
घटना के बाद मरीजों के परिजनों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने कलेक्टर एवं स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि अस्पताल में 24 घंटे प्रभावी सुरक्षा गार्डों की तैनाती की जाए। सभी प्रवेश द्वारों पर सख्त निगरानी सुनिश्चित की जाए। आवारा पशुओं की रोकथाम के लिए स्थायी व्यवस्था बनाई जाए। लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई हो।
सबसे बड़ा सवाल
जिस स्थान पर नई जिंदगी जन्म लेती है, यदि वही स्थान रात के अंधेरे में असुरक्षित हो जाए, तो यह पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर करारा तमाचा है।अब देखना यह है कि यह घटना प्रशासन के लिए चेतावनी बनती है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबा दिया जाएगा।


