डिंडौरी/ शैलेश नामदेव/ खबर डिजिटल/ dindori pradhan mantri awas yojana – सरकारी योजनाओं में धांधली और गरीबों के हक पर डाका डालने का एक बड़ा मामला डिंडोरी जिले की ग्राम पंचायत सारसताल से सामने आया है। यहाँ प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण और पीएम जनमन आवास योजना के तहत बनने वाले मकानों में भारी अनियमितता के आरोप लगे हैं। ग्रामीणों ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि वहां तैनात रोजगार सहायक उमेद सिंह परस्ते है, जिन्होंने कथित तौर पर ठेकेदारी के नाम पर हितग्राहियों की राशि हड़प ली है।
ग्रामीणों ने शिकायत में बताया कि रोजगार सहायक ने मकान बनवाने का जिम्मा खुद लेते हुए हितग्राहियों से किश्तों की राशि अपने पास जमा करवा ली। ग्रामीणों को लगा कि सरकारी कर्मचारी के दखल से उनका मकान जल्दी और मजबूत बनेगा, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत निकली।
यह भी पढें- मध्यप्रदेश भाजपा की गुप्त बैठक, आज जारी होगी नियुक्तियों की सूची!
अधूरा छोड़ दिया गरीबों का आशियाना
कई हितग्राहियों के मकानों का काम बीच में ही अधूरा छोड़ दिया गया है। कहीं केवल दीवारें खड़ी हैं, तो कहीं छत डलने का इंतजार हो रहा है।आरोप है कि सरकारी रिकॉर्ड और पोर्टल पर इन अधूरे मकानों को ‘पूर्ण’ दिखा दिया गया है, ताकि कागजी तौर पर योजना का लक्ष्य पूरा दिखे और भुगतान निकाला जा सके। रानी बूढ़ार में एक ही परिवार के पति-पत्नी दोनों के नाम पर आवास स्वीकृत कर उनके रिकॉर्ड में हेरफेर करने का मामला भी उजागर हुआ है। ऐसे में जमीनी हकीकत और प्रशासनिक तंत्र पर सवाल उठना लाज़मी है ।
प्रधानमंत्री आवास के हितग्राहियों का कहना
हितग्राहियों का कहना है कि वे जिला प्रशासन और जनसुनवाई के चक्कर काट-काट कर थक चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बारीकी से जांच की जाए, तो सारसताल पंचायत में आवास निर्माण के नाम पर एक बड़ा झोल सामने आ सकता है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जनपद पंचायत सीईओ प्रमोद ओझा ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के ऐसे मामलों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह भी पढें-126 अस्पतालों की आयुष्मान मान्यता रद्द, MP में गहराया LPG संकट
जनपद पंचायत CEO प्रमोद ओझा का बयान..
CEO प्रमोद ओझा ने बताया कि मामला मेरे संज्ञान में आया है। इसकी पूरी जांच की जाएगी। यदि कोई भी दोषी पाया जाता है और गरीबों के पैसे के साथ खिलवाड़ की पुष्टि होती है, तो संबंधित के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। अब सारसताल के ग्रामीणों की नजरें प्रशासन की जांच पर टिकी हैं। उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही दोषियों को सजा मिलेगी और उनके अधूरे पड़े मकानों का काम पूरा हो सकेगा।
