डिंडौरी/शैलेश नामदेव/ खबर डिजिटल/ नगर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और लगातार हो रहे हमलों को लेकर अदालत ने नगर परिषद डिंडोरी पर सख्त रुख अपनाया है। लोक उपयोगी लोक अदालत के अध्यक्ष एवं जिला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रवीन्द्र गुप्ता ने परिषद को 29 नवंबर तक विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। साथ ही स्थायी कुत्ता शेल्टर होम के निर्माण और कुत्तों को पकड़ने की तत्काल कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं। यह कार्रवाई अधिवक्ता सम्यक जैन और गंगा रजक द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई, जिसमें शहर में कुत्ता काटने की घटनाओं में तेजी से वृद्धि, नागरिकों की सुरक्षा पर बढ़ते खतरे और नगर परिषद की लापरवाही को गंभीर मुद्दा बताया गया था। याचिका में गंगा रजक के भाई समेत कई नागरिकों पर हुए कुत्ता हमलों को भी आधार बनाया गया।
सिर्फ टीकाकरण से समस्या हल नहीं होगी – याचिकाकर्ता
सुनवाई में अधिवक्ता सम्यक जैन और के.के. सोनी ने तर्क दिया कि नगर परिषद वर्षों से केवल टीकाकरण कर “औपचारिक दिखावा” कर रही है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और ए.बी.सी. (Animal Birth Control) नियमों का हवाला देते हुए स्पष्ट कहा कि सिर्फ टीकाकरण पर्याप्त नहीं है, बंध्याकरण और नसबंदी के बाद कुत्तों को सुरक्षित स्थायी आश्रय गृह में रखना अनिवार्य है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि परिषद की लापरवाही के कारण नागरिक रोजाना खतरे का सामना कर रहे हैं।
नगर परिषद के हल्के जवाब पर अदालत नाराज
सुनवाई के दौरान नगर परिषद की ओर से केवल समिति गठन का प्रस्ताव रखा गया, जिसे याचिकाकर्ता पक्ष ने नियमों की “खुली अवहेलना” बताते हुए विरोध किया। अदालत ने परिषद के इस रवैये पर नाराज़गी व्यक्त करते हुए कहा कि नागरिकों की सुरक्षा कागजी प्रक्रियाओं से नहीं, बल्कि जमीनी कार्रवाई से सुनिश्चित होगी। परिषद का यह रवैया गंभीर लापरवाही है।


