P?c1=2&c2=41463588&cv=3.9
Friday, April 17, 2026
No menu items!
spot_img
Homeमध्यप्रदेशमेघनगर में जनजाति गौरव दिवस की शर्मनाक उपेक्षा… प्रशासनिक लापरवाही उजागर

मेघनगर में जनजाति गौरव दिवस की शर्मनाक उपेक्षा… प्रशासनिक लापरवाही उजागर

भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती बनी औपचारिकता

झाबुआ/सुनील डाबी/खबर डिजिटल/ झाबुआ जिले भर में जहां भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर जनजाति गौरव दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया, वहीं मेघनगर में यह कार्यक्रम प्रशासनिक उदासीनता और अधिकारियों की मनमानी का शिकार होकर पूरी तरह फीका पड़ गया। जनपद पंचायत द्वारा आयोजित ब्लॉक स्तरीय कार्यक्रम में स्थानीय विधायक से लेकर जनपद अध्यक्ष, नगर परिषद अध्यक्ष, भाजपा मंडल अध्यक्ष—किसी भी जनप्रतिनिधि को औपचारिक रूप से आमंत्रित तक नहीं किया गया। यह स्थिति सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों का खुला अपमान मानी जा रही है।

अधिकारियों की मनमानी: जनप्रतिनिधि पूरी तरह दरकिनार
सूत्रों के अनुसार एसडीएम रितिका पाटीदार के नेतृत्व में कई दिनों से कार्यक्रम की रूपरेखा बनाई जा रही थी, लेकिन पूरे आयोजन को जनप्रतिनिधियों से दूर रखते हुए गोपनीय तरीके से तैयार किया गया। न जनपद अध्यक्ष, न नपा अध्यक्ष, न विधायक, न मंडल अध्यक्ष—किसी को बैठक में बुलाया गया, न योजना में शामिल किया गया। स्थानीय नेताओं ने आरोप लगाया कि यह रवैया दिखाता है कि अधिकारी जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों को कितना कम सम्मान देते हैं।

कार्यक्रम में भीड़ जुटाने में भी विफल
61 पंचायतों से एक भी सरपंच मौजूद नहीं कम्युनिटी हॉल में हुए आयोजन की स्थिति और भी दयनीय रही। स्वच्छता कर्मियों, कुछ शिक्षिकाओं और कुछ विद्यार्थियों को मिलाकर भी भीड़ 100 तक नहीं पहुँच सकी। वहीं झाबुआ, पेटलावद, थांदला जैसे अन्य ब्लॉकों में भारी जनसहभागिता देखने को मिली। हॉल में बड़े पर्दे पर सिर्फ सरकारी कार्यक्रम का प्रसारण चलता रहा, जिससे लोग निराश होकर बाहर निकलते दिखे।

भाजपा की रैली में उमड़ी भीड़, पानी तक उपलब्ध नहीं
दोपहर में भाजपा मंडल अध्यक्ष रूप सिंह भूरिया के नेतृत्व में निकली रैली में सैकड़ों कार्यकर्ता पारंपरिक वेशभूषा के साथ शामिल हुए। रैली बस स्टैंड पहुंची, जहां रंगोली तो बनाई गई थी, लेकिन कार्यक्रम की कोई ठोस व्यवस्था नहीं थी। यहां तक कि कार्यकर्ताओं के लिए पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं की गई, जिससे भारी नाराज़गी देखने को मिली।

कम्युनिटी हॉल के बाहर रोके गए भाजपा नेता, अपमानित होकर लौटे
जब रैली के बाद भाजपा नेताओं का प्रतिनिधिमंडल कम्युनिटी हॉल पहुँचा तो उन्हें लंबे समय तक अंदर प्रवेश नहीं दिया गया। बाद में सीईओ प्रज्ञा साहू ने अंदर आने का आग्रह किया, लेकिन तब तक भाजपा नेता अपमानित महसूस कर चुके थे और कार्यक्रम में शामिल हुए बिना ही वापस लौट गए।

जनप्रतिनिधियों का सीधा आरोप—”यह जानबूझकर किया गया अपमान है”
वीर सिंह भूरिया, विधायक

“सीईओ हो या एसडीएम—किसी ने मुझे कार्यक्रम का निमंत्रण नहीं दिया। यह पहली बार नहीं है। अधिकारी लगातार जनप्रतिनिधियों को नजरअंदाज कर रहे हैं। यह सीधा-सीधा अपमान है।”
कमलेश मचार, अध्यक्ष नगर परिषद

“तैयारियों से लेकर कार्यक्रम तक हमें कहीं शामिल नहीं किया गया। सिर्फ व्हाट्सऐप पर संदेश भेज देना निमंत्रण नहीं होता। यह रवैया अस्वीकार्य है।”
ललिता मुणिया, जनपद अध्यक्ष

“बैठकों में न हमें बुलाया गया, न तैयारी की जानकारी दी गई। अधिकारी अपनी मर्जी से अपने लोगों को बुलाते हैं। यह सरकार के निर्देशों की खुलेआम अवहेलना है।”

अब उठ रहे हैं सख्त कार्रवाई की मांग के स्वर
स्थानीय जनप्रतिनिधियों, भाजपा कार्यकर्ताओं और समाजजनों का कहना है कि—

कार्यक्रम का राजनीतिकरण नहीं, बल्कि प्रशासनिक अहंकार उजागर हुआ है।
अधिकारियों द्वारा जनप्रतिनिधियों को दरकिनार करना सेवा नियमों का उल्लंघन है।
सीईओ पर विभागीय जांच और कड़ी कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में इस स्तर की लापरवाही दोबारा न हो।
भगवान बिरसा मुंडा जैसे महान विभूति के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम को कमजोर करना जनभावनाओं का भी अपमान है।

लोगों की स्पष्ट मांग है कि जिम्मेदार अधिकारियों पर त्वरित, कठोर और दिखने योग्य कार्रवाई हो, अन्यथा यह संदेश जाएगा कि प्रशासन जनता के प्रतिनिधियों को कितना कमतर समझता है।

सम्बंधित ख़बरें

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

लेटेस्ट