मध्य प्रदेश के खंडवा शहर के गणेश तलाई इलाके में स्थित खेड़ापति हनुमान मंदिर पूरे निमाड़ क्षेत्र में आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है. यह मंदिर अपनी प्राचीनता, चमत्कारों से जुड़ी मान्यताओं और खास परंपराओं के कारण लोगों के बीच अलग पहचान रखता है. यहां हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं और अपनी मनोकामनाएं लेकर भगवान के सामने प्रार्थना करते हैं.
मंदिर में हर मनोकामना होती है पूरी
इस मंदिर की सबसे खास बात यहां स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा को लेकर है. इसे स्वयंभू माना जाता है. श्रद्धालुओं की मान्यता है कि बजरंगबली पीपल के पेड़ के तने से खुद प्रकट हुए थे. इसी वजह से इस स्थान को ‘खोड़या हनुमान’ के नाम से भी जाना जाता है. यह मान्यता भक्तों के विश्वास को और मजबूत बनाती है. मंदिर में अर्जी लगाने की एक अलग परंपरा भी प्रचलित है. यहां आने वाले श्रद्धालु श्रीफल यानी नारियल चढ़ाकर अपनी मनोकामना भगवान के सामने रखते हैं. कहा जाता है कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन से यहां अर्जी लगाता है, उसकी इच्छा जरूर पूरी होती है.
यहां पूजा करने से क्या होता है
जब किसी भक्त की मनोकामना पूरी हो जाती है, तो वह हनुमान जी का चोला चढ़ाकर पूजा कराता है. कई लोग इस अवसर पर सवामणी या भंडारे का आयोजन भी करते हैं. यही वजह है कि मंदिर में सालभर धार्मिक गतिविधियां चलती रहती हैं और यहां हमेशा श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रहती है. मंदिर के पुजारी संतोष शुक्ला के अनुसार, यहां पूजा करने से शनि, राहु और केतु जैसे ग्रहों के दुष्प्रभाव से राहत मिलती है. इसी कारण कई लोग अपनी कुंडली के दोष दूर करने के लिए भी यहां आते हैं. चोला पूजन के बाद भक्तों को मानसिक शांति मिलने और परेशानियों से छुटकारा मिलने की मान्यता है.
कई वर्षों पुराना है मंदिर
मंगलवार और शनिवार को मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना होती है, जिन दिनों यहां भक्तों की संख्या और बढ़ जाती है. हनुमान जयंती के मौके पर मंदिर को भव्य रूप से सजाया जाता है और दर्शन के लिए लंबी कतारें लगती हैं. लोग नौकरी, व्यापार, स्वास्थ्य और पारिवारिक समस्याओं के समाधान के लिए यहां अर्जी लगाते हैं. श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां से कोई भी निराश होकर नहीं लौटता. यह मंदिर कई वर्षों पुराना है और यहां की परंपराएं आज भी उसी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही हैं. स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दूर से आने वाले भक्तों का भी इस मंदिर पर गहरा विश्वास है. यही कारण है कि यह स्थान आज भी आस्था का एक महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है.
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