रायसेन/ नसीम अली/ खबर डिजिटल/ MGNREGA Scam Raisen: सरकारी योजनाओं का उद्देश्य गरीबों को लाभ पहुंचाना था, लेकिन जब धरातल पर इन योजनाओं की हकीकत सामने आई तो भ्रष्टाचार की ऐसी तस्वीर दिखी जिसने सबको चौंका दिया। जनपद पंचायत बाड़ी के अंतर्गत ग्राम पंचायत उड़दमऊ में सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक के कारनामों ने मनरेगा योजना को मज़ाक बना दिया है। यहां मृत व्यक्तियों के नाम से मनरेगा में मजदूरी कराई जा रही है और सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया है।
ग्राम गोरिया, इमलिया और आफतगंज में ऐसे कई मृत लोगों के जॉब कार्ड पंचायत दर्पण पोर्टल पर सक्रिय दिखाए गए हैं। मृतक नवाब खान, शब्बीर खान और रशीद खान जैसे नाम अब भी मनरेगा रिकॉर्ड में मजदूरी करते नजर आ रहे हैं। इतना ही नहीं, ग्रेवल रोड, कपिल धारा कूप, खेत तालाब योजना और सीसी नाली निर्माण के नाम पर जेसीबी और ट्रैक्टर ट्रालियों से काम कराकर मजदूरों के नाम से भुगतान किया गया। कई हितग्राहियों से शौचालय की राशि भी ठगी गई।
ग्रामीण मजदूरों — रुआब खान, गोपाल सिंह, मधुसूदन, संतोष धाकड़, मेहराब खान, जलील खान, हारून खान, अनीस खान, फिरदौस खान, ग्यारसी धाकड़, जालम सिंह — ने बताया कि उनके नाम पर फर्जी भुगतान किया गया, जबकि उन्होंने कोई काम नहीं किया।
ग्राम पंचायत की महिला सरपंच के पति संदीप राय और सचिव पर आरोप है कि वे राजनीतिक पहुंच का उपयोग कर भ्रष्टाचार को खुलकर बढ़ावा दे रहे हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि अधिकारियों और नेताओं की मिलीभगत से यह खेल वर्षों से चल रहा है।
अब सवाल यह है कि जब प्रशासनिक अधिकारियों की नाक के नीचे यह खेल चल रहा है, तो कार्रवाई क्यों नहीं होती? क्या प्रशासन मृत आत्माओं को भी मजदूरी दिलवाने का नया तरीका ढूंढ चुका है? यदि इस पंचायत की जांच उच्च स्तर से की जाए तो भ्रष्टाचार के बड़े खुलासे हो सकते हैं और कई जिम्मेदार लोग जेल की सलाखों के पीछे पहुंच सकते हैं।


