भोपाल/खबर डिजिटल/ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को पारदर्शी ऑनलाइन प्रक्रिया से नवनियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को विधानसभा के समिति कक्ष में हुए कार्यक्रम में नियुक्ति-पत्र प्रदान कर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नवनियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं से कहा कि आपकी जिम्मेदारी यशोदा मैया की तरह है, जिस प्रकार उन्होंने गोपाल कृष्ण का पालन-पोषण कर उन्हें संस्कार प्रदान किए, उसी तरह आप भी आंगनवाड़ी में आने वाले हर बच्चे की देखभाल श्रीकृष्ण की तरह करें। नवनियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को नियुक्ति पत्र के रूप में बच्चों की मुस्कुराहट, पोषण और माताओं के स्वास्थ्य व सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने का वचन पत्र सौंपा जा रहा है। हमें विश्वास है कि हमारी बहनें अपना दायित्व पूर्ण समर्पण और प्रतिबद्धता से निभाएंगी और प्रदेश को कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में विजय दिलवाएंगी। कार्यक्रम में महिला बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया, विधायक तथा पूर्व मंत्री अर्चना चिटनीस, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई और विभाग की सचिव जी.वी. रश्मि विशेष रूप से उपस्थित थीं।
कार्य निर्वहन की दिलाई शपथ
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रतीक स्वरूप तीन नवनियुक्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को नियुक्ति-पत्र प्रदान किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में विधायक श्रीमती अर्चना चिटनीस ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को अपने कार्य दायित्व का निर्वहन पूरी निष्ठा और ईमानदारी से करने, विकसित मध्यप्रदेश@2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में हरसंभव योगदान देने और सुपोषित मध्यप्रदेश के निर्माण में अपने दायित्व का पूर्णत: पालन करने की शपथ दिलाई। नवनियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं ने विधानसभा संचालन की प्रक्रिया भी देखी।
‘आंगनवाड़ी दीदी को मिलता है सम्मान’
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज भी गांवों में आंगनवाड़ी वाली दीदी को जो सम्मान मिलता है, उतना किसी और को नहीं मिलता। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका परिवार की सदस्य बन जाती हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि न्यू इंडिया की मजबूत नींव मातृ शक्ति से ही बनती है। साथ ही कहा कि हमारी आंगनवाड़ी की बहनें इसे सार्थक कर रही हैं। यह बहनें केवल कार्यकर्ता नहीं अपितु गांव की पहली गुरू और पहली पोषण दूत हैं। इनकी वजह से लाखों बच्चों में कुपोषण कम हो रहा है और गर्भवती माताओं में जागरूकता बढ़ रही है। स्कूलों में ड्रापआऊट रेट में भी कमी आयी है। राज्य सरकार बहनों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है।


