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Friday, April 17, 2026
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Har Ghar Nal Jal Yojana MP की खुली पोल, सिर पर खाली बर्तन लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीण


डिंडौरी/ खबर डिजिटल/ शैलेश नामदेव/ Har Ghar Nal Jal Yojana MP प्रदेश सरकार और प्रशासन भले ही हर घर नल से जल पहुँचाने के बड़े-बड़े दावे कर रहे हों, लेकिन डिंडोरी जिले के आदिवासी अंचलों की जमीनी हकीकत इन दावों से कोसों दूर है। गर्मी की दस्तक के साथ ही जिले के ग्रामीण इलाकों में पानी के लिए हाहाकार मचने लगा है। स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि ग्रामीणों को अपनी प्यास बुझाने के लिए तपती धूप में कई किलोमीटर का सफर तय करना पड़ रहा है।

​सिर पर खाली बर्तन लेकर कलेक्ट्रेट पहुँचे ग्रामीण

​ताजा मामला विकासखंड मेहदवानी की ग्राम पंचायत जरगुड़ा के घंघारीटोला रैयत मॉल का है। यहाँ के ग्रामीण पिछले कई सालों से भीषण जल संकट का सामना कर रहे हैं। अपनी समस्या को लेकर मंगलवार को लगभग 25-30 ग्रामीण, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल थीं, सिर पर खाली बर्तन और टंकियां लेकर जिला मुख्यालय स्थित जनसुनवाई में पहुँचे। ग्रामीणों ने कलेक्टर के समक्ष अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि वे किस तरह नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं।

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​दूषित पानी और बदहाल व्यवस्था

​ग्रामीणों का आरोप है कि उनके टोले में लगा एकमात्र हैंडपंप भी अब साथ छोड़ चुका है। वर्तमान में उस हैंडपंप से लाल रंग का दूषित पानी निकल रहा है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। मजबूरन ग्रामीणों को पीने योग्य पानी के लिए गांव से दूर 2 किलोमीटर का पैदल सफर तय करना पड़ता है। बार-बार की शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने अब तक इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया है।

​कागजी दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर

इस पूरे मामले ने जल विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह उठता है कि
​करोड़ों रुपये की लागत वाली नल-जल योजनाएं आखिर जमीन पर क्यों नहीं दिख रहीं?
​क्या जिम्मेदार विभागों की योजनाएं केवल फाइलों और आंकड़ों तक ही सीमित हैं?
​गर्मी की आहट के साथ प्रशासन ने पेयजल आपूर्ति के लिए पूर्व में इंतजाम क्यों नहीं किए?

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अन्य क्षेत्रों में भी विकराल स्थिति

​जल संकट की यह समस्या केवल जरगुड़ा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि जिले के कई अन्य अंचलों से भी ऐसी ही तस्वीरें सामने आ रही हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
​फिलहाल, जनसुनवाई में पहुँचे ग्रामीणों को आश्वासन तो मिला है, लेकिन देखना यह होगा कि उन्हें स्वच्छ पानी के लिए और कितने दिनों तक 2 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है।

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