आगरा में घरेलू गैस सिलिंडर की रीफिलिंग के लिए तय 45 दिन का अंतराल और व्यावसायिक सिलिंडरों की कम आपूर्ति ने कालाबाजारी को बढ़ावा दे दिया है. हालात ऐसे हैं कि गैस एजेंसियों की मिलीभगत के आरोपों के बीच हॉकर जमकर फायदा उठा रहे हैं. 925 रुपये में मिलने वाला घरेलू सिलिंडर जरूरतमंद लोगों को 1800 से 2000 रुपये तक में बेचा जा रहा है. इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारी अभी तक कोई सख्त कदम उठाते नजर नहीं आ रहे हैं.
एलपीजी गैस की हो रही है कालाबजारी
गैस की कमी का सबसे ज्यादा असर छोटे कारोबारियों पर पड़ा है. डेयरी संचालक, रेस्टोरेंट, हलवाई और स्ट्रीट वेंडर्स जैसे लोग, जो रोजमर्रा के काम के लिए गैस पर निर्भर हैं, अब मजबूरी में महंगे दामों पर सिलिंडर खरीद रहे हैं. बताया जा रहा है कि व्यावसायिक सिलिंडरों की आपूर्ति में करीब 80 प्रतिशत तक की कमी आ गई है. मांग के मुकाबले आधी गैस ही मिल पा रही है, जिसका फायदा उठाकर हॉकर मनमानी कीमत वसूल रहे हैं.
व्यावसायिक सिलिंडरों की खपत करीब 40 हजार
जिले में करीब 89 गैस एजेंसियां हैं, जिनसे 12 लाख से ज्यादा घरेलू उपभोक्ता जुड़े हुए हैं. वहीं व्यावसायिक सिलिंडरों की खपत करीब 40 हजार के आसपास है. पिछले महीने पूर्ति विभाग ने कालाबाजारी के आरोप में चार गैस एजेंसियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी, लेकिन आरोप है कि जांच आगे नहीं बढ़ाई गई. इस ढिलाई के चलते अब विभाग और एजेंसी संचालकों की मिलीभगत पर सवाल उठने लगे हैं. यह समस्या केवल शहर तक सीमित नहीं है. ग्रामीण इलाकों में भी कालाबाजारी तेजी से फैल रही है. छोटे व्यापारी और आम लोग अपनी जरूरत पूरी करने के लिए ज्यादा पैसे देने को मजबूर हैं. प्रशासन की चुप्पी से इस अवैध कारोबार को और बढ़ावा मिल रहा है. इस मामले पर जिलाधिकारी अरविंद बंगारी ने कहा है कि आपूर्ति अधिकारी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी जाएगी. सभी संदिग्ध एजेंसियों की जांच कराई जाएगी और जो भी कालाबाजारी में शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
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